ऑफिस की लड़कियों की चुदाई – ४: चार मम्मे एक लंड
उस रात ऑफिस के बाद हम तीनों अलग अलग अपने घर गए, तैयार हुए और डिन्नर के लिए एक रेस्टोरंट में मिलना तय हुआ. दोनों लडकियां एकदम सज धज के तैयार हो के आयी थी. एकदम परियां लग रही थी. अखिला एकदम टाईट टी-शर्ट और टाईट सुपर-मिनी में एकदम भरपूर हरी भरी चुदाई के लिए तैयार अप्सरा लग रही थी तो दिया टाईट जींस शोर्ट्स और लो-कट टी-शर्ट में अपनी गौरी गौरी चमड़ी के चलते एकदम परी लग रही थी. कपडे ऐसे फिट आ रहे दोनों को के न तो टाईट लग रहे थे, ना ढीले, ऐसे जैसे के शरीर का ही हिस्सा हों. एक एक उभार, शरीर का उतार चढ़ाव ऊपर से नज़र आ रहा था. भूख तो किसे थी, तो थोडा बहुत खाया, फिर दिया और अखिला को अपने साथ घर वापिस लेने के लिए हम लोग कार में बैठे. पूरे डिन्नर में दिया की चुदाई कैसे करनी है, सोचता रहा. खैर, कार में दिया मेरे पीछे बैठी थी और अखिला मेरे साथ पैसेंजर सीट पे. अपनी औटोमटिक ट्रांस मिशन के चलते गेअर बदलने की ज़रुरत थी नहीं, तो मेरा बायाँ हाथ फ्री था. सो मैंने गाडी शुरू कर के अपना हाथ अखिला की गोरी -चिट्टी और एकदम चिकनी चमचमाती जाँघों पे रख दिया. मैंने अपना हाथ उसके जाँघों में फेरना शुरू कर दिया तो उसने भी अपना हाथ मेरे लंड पे रख दिया. मेरा लौड़ा पहले ही खडा हुआ था. मैं अपने आप को बता रहा था के थोड़ा धीरे धीरे नहीं तो घर पहुँचने से पहले माल ना निकल जाए. मैंने अपना हाथ ऊपर ले जाते हुए उसकी मिनी को ऊपर सरका दिया. मेरा हाथ ऊपर बढ़ता हुआ उसकी चूत के एकदम ऊपर पेंटी से जा टकराया. एकदम नर्म नर्म, गर्म गर्म और हल्की सी गीली चूत थी उसकी. मैं अपनी उंगली से उसकी चूत की लकीर पे लकीरें बनाता रहा. वो एकदम मद मस्त हो उठी. मैंने दिया से कहा – कभी अखिला के मम्मे पकडे हैं? उसने कहा- नहीं. मैंने कहा- पकड़ के देखो, कितने मजेदार हैं. उसने दूसरी और सरक के खट्टाक से अखिला के मम्मे पकड़ लिए. अखिला वासना से एकदम उत्तेजित हुई जा रही थी, सो आहें भरने लगी. मैंने दिया से बोला के हलके हलके दबाती रहो, तो उसने अखिला के मम्मे दबाने शुरू कर दिए. मैंने अपने हाथ से पेंटी को एक तरफ सरकाया, और उँगलियों से उसकी नंगी चूत को छू लिया. वो एकदम तड़प उठी. मैंने अपनी उंगली से उसकी चूत के होंठ को एक और खींचा, और हलके हलके से अपनी उंगली घुसा दी. उसने कस के मेरे हाथ को पकड़ लिया.
उसकी गीली चूत में मैं हलके हलके उंगली अन्दर बाहर करने लगा. पीछे से दिया उसके चूचे दबाये जा रही थी. अखिला अब चूत से चू सी रही थी और कांपने लगी. मैं उंगली और अंगूठे से उसकी चूत से छेड़खानी करता रहा. करते करते घर आ गया. अखिला ने अपने कपडे सीधे किये और कार से बाहर निकली. मेरा घर दूसरी मंजिल पे था, तो मैंने उन्हें आगे आगे कर दिया और उनके पीछे पीछे उनकी गांड मचलते हुए देखते हुए ऊपर चढ़ गया. मैंने ऊपर आ के दरवाजा खोला और हम तीनों अन्दर चले आये. अन्दर घुसते ही तीनों ने एक साथ किस्स किया. मैं थोडा पीछे हट के दोनों लड़कियों को आपस में चुम्बन लेने के नज़ारे का आनंद लेने लगा. वो दोनों आँखें बंद कर के इतने प्यार से एक दुसरे को किस्स कर रही थी के दिल किया के दोनों के होंठों के बीच में अपना लंड दे दूं. आपस में किस्स करते करते दोनों लडकियां एक दुसरे के काफी नज़दीक आ गयी. दिया ने अपना हाथ उठाया और अखिला की बाजू को हलके से छुआ, फिर हलके से उसकी बाजू पे हाथ फेरते हुए उस के नजदीक आ गयी. अब दोनों के मम्मे आपस में टकरा रहे थे. मैंने उन दोनों को ज्वाइन किया इस चुम्बन प्रक्रिया में. मैं दोनों के होंठ बड़ी देर तक चूसता रहा. मैंने एक हाथ अखिला की कमर पे रखा और दूसरा दिया की कमर पे और उन की कमर सहलाते हुए अपना हाथ दोनों की रीढ़ पे दौडाते हुए उनकी गांडों तक ले गया. किस्स करते करते मैं उनकी गांडे सहलाता रहा और फिर मैंने दोनों के कूल्हों को पकड़ के दबाना शुरू कर दिया. दोनों लडकियां मेरी और थोड़ी घूमी, और अब उनकी चूचियां मेरी छाती से भी लग रही थी. अखिला की उठी उठी एकदम तनी हुई चूचियां एक तरफ तो दूसरी और दिया की नाजुक नाजुक दूधिया चूचियां, जिन्हें मैंने अब तक देखा नहीं था.
करते करते दोनों लड़कियों के हाथ एक दुसरे के मम्मों पे पहुँच गए. मैंने दिया के शोर्ट्स की बटन खोली और नीचे खिसकानी शुरू कर दी. दुसरे हाथ से मैंने अखिला के गोल गुन्दाज़ कूल्हों को पकड़ा और मिनी स्किर्ट को ऊपर उठा के उसकी पेंटी पर हाथ रख के उसके नितम्बों को थाम के दबाने लगा. दिया ने अखिला की टी-शर्ट ऊपर उठाई. मैंने सोचा के दिया को मैं थोड़ी ज्यादा सीधी समझ रहा था, लेकिन दिया तेज है और अखिला इस सब चुदाव के बाद भी उतनी खुली नहीं है. ऐसा लग रहा था के मैं और दिया मिले के अखिला को चोद रहे हैं.
अखिला ने अन्दर बिना स्ट्रेप वाली ब्रा पहन राखी थी, जो बड़ी मुश्किल से उसके मोटे मोटे चूचों को अपने काबू में कर पा रही थी. मैंने झुक के उसके ब्रा के हुक खोल दिए और उसकी ब्रा निकाल के ज़मीन पे फ़ेंक डाली. उसके एकदम दूधिया और तने हुए चूचों को देख के न्यूटन की गुरुत्वाकर्षण शक्ति भी शर्मा जाए. उसके हलके गुलाबी रंग के निप्पल काफी बड़े और स्पंज की तरह नर्म नर्म थे. मैंने अपनी उँगलियों से उसके निप्पलों पे एक च्यूंटी मारी.दुसरे को दिया चूसने लगी. मैं दिया के पीछे जाके खडा हो गया और उसकी शोर्ट्स को नीचे उतारने लगा. उसकी शोर्ट्स उतार के मैं झुक के उसकी गांड को पेंटी के ऊपर ऊपर से चूमने लगा और हाथों से दबोच दबोच के दबाने लगा. फिर मैं उसकी पेंटी भी उतार दी. उसकी गांड नर्म नर्म थी और एकदम मॉडल जैसी शेप वाली, एकदम नाजुक मैंने उसके एक कूल्हे पर दाँतों से हलके से काटा, फिर थोड़े जोर से काटा लेकिन दिया ने उफ्फ़ तक न की. वो अखिला के मम्मों को दबाती, चबाती और चूसती रही. फिर मैंने अपनी पेंट और चड्ढी उतार फेंकी. मैं दिया के पीछे खडा हो गया. मेरा तना हुआ लंड मैंने उसके कूल्हों के बीच में रखा और उसके पीछे से उससे चिपट गया. फिर मैंने अपने हाथ सामने डाल के उसके टी-शर्ट में हाथ दे दिए. थोड़ी देर मैं टी-शर्ट में हाथ डाल के उसने नर्म नर्म चूचे दबाता रहा और उसके सख्त निप्पल पे च्यूंटी काटने लगा. दिया भी अखिला की तरह आहें भरने लगी. करते करते मैंने दिया की टी-शर्ट भी उतार फेंकी. फिर मैंने अपने उसके पीछे खड़े खड़े अपने हाथों से उसके दोनों कूल्हों को थामा और थोडा चौड़ा किया. मेरा लंड अब और ज्यादा आराम से उसके कूल्हों के बीच में बैठा था.
(बाकी अगले अंक में)