ऑफिस की लड़कियों की चुदाई ५: तेरी सहेली के साथ में, दिया तेरी गांड में

March 12, 2011 Leave a comment

अपने हाथों से दिया के दोनों कूल्हे पकड़ के मैंने अपना लंड एकदम दिया के नितम्बों के बीच में सटा दिया. मेरी जाँघों से जब उसके नर्म नर्म कूल्हे आ लगे तो दिल में हाय हाय सी मच उठी. मैंने अपना हाथ उसके गोल गोल कूल्हों के नीचे ले जाते हुए उसकी गांड के छेड़ के नजदीक ले जाके दोनों और खोलने की कोशिश की. एकदम नर्म और नाजुक गांड थी उसकी. फिर मैंने अपने एक हाथ से उसके कूल्हे पे जोर लगाते हुए उसकी गांड एक और को खींची और दूसरा हाथ उसके दोनों कूल्हों के बीच में सरका दिया. हाथ सरकते हुए उसकी गांड के छेड़ से जा लगा. एकदम गर्म गर्म गांड. मैंने अपनी उंगली और नीचे को सरकाई और उसकी गांड और चूत के बीच के नर्म हिस्से को सहलाने लगा. दिया ऐसी बदहवास हुई के उसने जोर से अखिला की चूची पे दांत गदा दिए. बदले में अखिला ने उसकी चूची जोर से दबा डाली. मैंने अपनी उंगली और नीचे सरकाई और उसकी एकदम क्लीन शेव की हुई फुद्दी के द्वार तक जा पहुंचा. उसकी चूत एकदम गीली थी. मैंने अपनी मंझली उंगली उसकी चूत में घुसेड दी. वो आह भर उठी. मैंने अब तर्जनी उसकी गांड में दाल दी और अपने एक ही हाथ की उँगलियों से उसकी गांड और चूत एक साथ चोदने लगा. थोड़ी देर ऐसे ही मजे लेने बाद मैंने उसको आगे को झुका दिया और पीछे से अपने लंड को उसके पीछे लगा दिया. दिया बोली – हाय इतना मोटा है. मैंने कहा- कोई नहीं, अन्दर जाएगा तो ज्यादा मजा आएगा. मैंने थोड़ा नीचे घुस के अपने लंड से उसकी चूत टटोलने का प्रयास किया. लंड से एकदम धुंआ निकल रहा होगा और चूत से पानी बरस रहा था. लेकिन लंड को चूत ना मिली. मैंने अपने एक हाथ से लंड पकड़ा और दुसरे से उसके कूल्हे को अद्जुस्त करके थोड़ा खोला. अब लंड उसके चूत के दरवाजे पे दस्तक दे रहा था. मैंने थोड़ी देर अपने शिश्न को उसकी चूत पे रगडा फिर उसकी टाईट चूत में थोडा सा अन्दर दिया. फिर उस की गीली चूत में लौड़ा सरकता ही गया. अब मैंने अखिला को अपने साथ बुला के खड़ा किया और दिया को और झुका दिया. दिया ने पास वाली दीवार का सहारा ले लिया. मैंने एक हाथ से उसकी जांघें दबाई और दुसरे हाथ को उसकी कमर पे रख के थोड़ा और आगे को झुकाया और एक ज़ोरदार धक्का दिया. लंड पूरा चूत में जा घुसा और दिया सी-सी करने लगी. मैंने झुक के उसकी चूची पकड़ी और उसके नर्म नर्म मम्मों को दबाने लगा. फिर साथ खड़ी अखिला के मम्मों में मैंने अपना मुंह छिपा लिया कभी उसके ताने हे मम्मों के नीचे से पप्पी लेता, कभी होठों से, कभी हलके हलके होंठों से उसके निप्पल काट खाता, कभी दांतों से. दूसरा हाथ मैंने उसके कूल्हों के पीछे ड़ाल दिया और उसके सुडौल गोल मटौल कूल्हों को भरपूर ताक़त से दबाने लगा. अखिला और भी नजदीक आके एकदम मुझसे लिपट के खड़ी हो गयी. इस दौरान मैंने दिया की चूत में दौ-चार ज़ोरदार धक्के लगाए. उसके गीलेपन से लंड फिसल फिसल के अन्दर बाहर जा भी रहा था और उसकी कसी हुई चूत मेरे लौड़े पर चारों और से गर्मी और कसाव बरसा रही थी. मैंने अखिला के कान में बाथरूम से तेल लाने को कहा. अखिला तो समझ गयी लेकिन दिया ने सूना नहीं. मैंने दिया के कन्धों पे दोनों हाथ रखे और झटके लगाने शुरू कर दिए. फच्च- फच्च की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी. जब मैं लंड बाहर को लेता तो मेरी जांघें दिया की गांड से बस हल्की सी छूती और जब मेरा लौड़ा पूरा अन्दर होता तो एकदम उसके गांड से सट जाती. मैंने मुश्किल से ५ मिनट उसे चौड़ा होगा के अखिला तेल ले आयी. तेल की बोतल में ऊपर एक हल्का सा छेद था. मैंने अखिला को इशारा किया तो उसने तेल की पिचकारी से दिया की गांड का निशाना बना कर एक धार उसकी गांड पे बरसा दी. दिया चौंकी और उसने अपनी गांड को थोडा अलग करने की कोशिश की लेकिन मैंने एक हाथ से उसका कांदा थाम रखा था और दूसरे हाथ से उसका कूल्हा. फिर मेरे कहने पे अखिला ने अपनी उंगली से तेल उसकी गांड पे मलना शुरू कर दिया. दिया को अब तो समझ आ ही गया होगा के उसका क्या हश्र होने वाला है.

फिर अखिला ने अपनी उंगली दिया की गांड में दे दी और दोनों लौंडियाँ ऐसे सिस्कारियां भरने लगी के गांड में कुछ फंसा दिया हो. वास्तव में कम से कम एक लडकी की गांड में तो कुछ फंसा ही था. फिर अखिला ने अपने हाथों से उसके कूल्हों को दोनों और फैलाने की कोशिश की. मैंने दिया को थोडा सीधा किया ताकी गांड में देने का कोण बने. उसका भूरा भूरा छेद दिखाई दे रहा था. मैंने अपना लंड उसकी चूत से निकाला और सुप्पाड़े को उसकी गांड से रगडा, फिर हल्का सा अन्दर घुसाया. उसने एकदम गांड भींच ली और उसके नर्म नर्म कूल्हे एकदम टाईट हो गए. मैंने कहा- “रिलेक्स, ऐसे कैसे अन्दर जाएगा”. वो बोली-”क्यूँ? ज़रूरी है?” मैंने कहा-” मज़ा आयेगा मेरी जान. मैं गांड मारने में एक्सपर्ट हूँ”. अब अश्लील बातें मैंने शुरू की थी, लेकिन लड़कियों को खाली बहाना चाहिए था.

उन्होंने ने अश्लील शब्द बोलने शुरू कर दिए.
इस बार पहले अखिला बोली – “बॉस- तुम गांड मारने के बहुत शौक़ीन हो, क्या बात है.” उसके मुंह से गंदी बातें सुन के लंड ने ज़रा झटका सा लिया.  मैं उसकी चूची पकड़ के बोला – “डार्लिंग, चूत भी साथ में चोदते हैं, ऐसी बात नहीं”. दिया बोली – “मैंने कभी पीछे से नहीं लिया, थोडा आराम से डालना”. मैंने कहा – “ऐसे नहीं, तमीज से बात करो” तो बोली – “मैंने गांड नहीं मरवाई ना, तो डर लगता है.” मैंने कहा- “कोई बात नहीं, रानी, आज गांड मरवाने के मजे भी ले लेना, लेकिन गांड इतनी टाईट मत करो. लौड़ा अन्दर लो फिर कितनी भी टाईट करो, फर्क नहीं पड़ता.” वो बोली- “इतना मौटा है, अन्दर घुसेगा भी?” मैं बोला – “अपनी सहेली से पूछो – एक रात में कितनी बार अन्दर लिया था” तो दिया ने जवाब दिया- “ये भी पूछो दौ दिन गांड में दर्द रहा था के नहीं”. मैं बोलते बोलते रुका के  मैं अकेला थोड़े न था लेकिन सोचा शायद अखिला ने पूरी बात ना बताई हो, सो बोला – “ठीक है, जानेमन आराम से मारेंगे तुम्हारी गांड”.

फिर मैंने अपने अंगूठों को लगा के उसकी गांड चौड़ी की और लौड़े को हाथ में लेके थोडा अन्दर घुसाने की कोशिश की. लौड़े का सुपाड़ा थोडा सा ही अन्दर जा पाया. मैंने कहा, चलो, लेट के करते हैं. मैंने दिया को उसकी बायीं करवट लिटाया अखिला को बोला उसकी दायीं टांग उठाए फिर मैंने अपने एक हाथ से अन्दर की तरफ से हाथ ड़ाल के उसका दायाँ कूल्हा ऊपर उठाया ताकि उसकी गांड खुले. उसकी नर्म नर्म गांड को ऐसे दबाने में और उससे खेलने में मजा आ रहा था. अब गांड थोड़ी खुली तो मैंने तेल लगे लौड़े को थोडा सा अन्दर धकेला. अब मेरा सुपाड़ा अन्दर था. मैंने उसका कूल्हा और ऊपर उठाया फिर थोडा और जोर लगाया, लौड़ा थोड़ा और अन्दर घुसा. दिया ने अपना हाथ मेरे बाजू पे कास दिया, बोली- बस, और नहीं जाएगा अन्दर. मैंने सोचा के इससे पहले के ये ज्यादा हाय तौबा करके मजा किरकिरा करे, झटके से काम करो. सो मैंने अपने लौड़े से खटाक से झटका देके पूरा लंड एक झटके में अन्दर घुसा दिया, तेल में चिकना हुआ लंड एकदम मानो चीरता हुआ गांड में घुसता चला गया. दिया एकदम दर्द से कराह उठी मैंने अपने हाथ से उसका मुंह पकड़ के उसके मुंह में उंगली डाली तो वो चूसने लगी. फिर मैंने उसे घुमा के उसकी गांड में लंड डाले डाले अपने ऊपर बिठाया और बिस्तर के कोने में आ बैठा. मैं अपने पैर नीचे लटकाए बैठा था  और वो मेरे लौड़े को अपनी गांड में लिए मेरी गोद में ऐसे बैठी थी के जैसे कुर्सी में बैठी हो.

अब वक़्त था धक्के लगाने का. सामने से अखिला आ के उसके साथ चुम्मा-चाटी करने लगी और उसके मम्मों को सहलाने लगी. मैंने अपने हाथों को उसके कूल्हों के नीचे लगाया और थोडा अपनी जाँघों और कूल्हों से जोर लगा के और थोडा अपने हाथों से उसके कूल्हों को उठा उठा के उसे उछाल उछाल के उसकी गांड मारने लगा. उसकी गांड इतनी टाईट थी के लंड का सारा रस निकालने पे आमादा हो. थोड़ी देर बाद अखिला ने उसके घुटने उठाए और उसके पैर मेरे घुटनों पे रख दिए. वो अब मेरे लौड़े पे ऐसे बैठी थी जैसे जमीन पे बैठी हो, घुटने छाती के सामने, गांड मेरे लंड पे और पैर मेरे घुटनों पे. अब अखिला ने अपने चूचे दिया के मुंह से लगाए और ऐसे प्यार से चुसाने लगी के मेरा पहले ही खडा लंड दिया की गांड में और चौड़ा हुआ जा रहा था. मैं दिया को अपने लौड़े पे बिठाये पीछे से लेते लेते लेट गया और उसकी कमर को पकड़ के जोर से ऊपर धक्के लगाने लगा. दिया के पतली और हल्की होने के चलते मेरे शरीर पे ज्यादा भार भी न था और अब वो खुद थोडा उछल उछल कर गांड चुदवाने लगी. मैंने कहा- “क्यूँ मजा आ रहा है ना”, वो बोली – “धत्त, बेशर्म “. मैंने कहा, हाँ, गांड मारते हुए बड़ी शर्म आ रही है मुझे तो वो हंसने लगी. अब भी उसके चेहरे पे दर्द के कारण तनाव नज़र आ रहा था.

मैं ऐसे ही उसकी गांड न जाने कितनी देर चोदता रहा फिर अखिला मेरे बाजू में आ लेटी. मैंने कस के उसके चूचे दबाने शुरू कर दिए. दुसरे हाथ से मैंने उसकी गांड दबानी शुरू कर दी. दिया ने मेरे लौड़े पे फुदकते फुदकते मुड़ के देखा और बोली – अब इसकी भी गांड मारोगे क्या? मैंने कहा- “क्यूँ नहीं, मस्त है ना.” दिया की चूचियां इतनी नुकीली थी के वो खुद ही अपनी चूचियों से अखिला की गांड मार ले और वो जब मुडी तो उसकी चूचियों के नुकीले निप्पल नज़र आये. मैंने थोड़ा ऊपर उठ के अपने अंगूठे और उंगली के बीच में उसका निप्पल पकड़ा और रगड़ रगड़ के दबाने लगा. मेरा लौड़ा अब एकदम माल निकालने वाला था तो मैंने थोडा सा धीरे होके दिया को साइड पे लिटाया, दो मिनट और जोर जोर से गांड में धक्के लगाए और लौड़ा निकाल लिया. अब लौड़ा इतना सख्त था और निकलने के इतने नजदीक था के खुद ही ऊपर नीचे होने लगा. मैंने तेल की शीशी उठाई और अपनी उंगली पे थोडा देल छिड़क के अखिला की गांड में घुसा दी. दिया अपने हाथों से मेरे लौड़े को हलके हलके ऊपर कर रही थी. मैंने अपना लंड अखिला की गांड पे लगाया और धीरे धीरे घुसाया. उसकी गांड २-३ दिन पहले बुरी तरह चुदने के बावजूद एकदम टाईट थी. मेरा लंड घुसते घुसते पूरा घुस गया और पूरा घुसते ही मेरा वीर्य निकल आया. मैंने अपने हाथ दिया की चुचियों में गड़ा दिए वो बोली – “ऐसे नहीं, जानवर हो क्या?”, लेकिन मैं सुनने की अवस्था में नहीं था. मैंने अपने शरीर को तीर कमान की तरह मोड़ा और आँखें बंद करके एक हाथ से दिया की चूची भींचते हुए अखिला की गांड से एकदम सटे हुए धक्का लगाया, रुका और फिर धक्का लगाया. तीन चार ऐसे धक्के लगाने के बाद मेरा लौदा धीरे धीरे नर्म होने लगा. मैंने लंड बाहर निकाला और उसके नर्म नर्म गोल हरे भरे कूल्हे से रगड़ के पोंछा. उसकी गांड से सफ़ेद वीर्य रिसने लगा. मैं एकदम ख़त्म सा हो गया था, सुबह दौ-दौ मुठ और अब दो लड़कियों की चुदाई. इस उम्र में इतनी एक्सरसाइज करने से हालत खराब हो जाती है. मैं तो चाहता था के लडकियां घर रुकें और रात में फिर एक दौ बार चुदाई का प्रोग्राम बने लेकिन लड़कियों ने घर वापिस जाने की जिद लगाई तो छोड़ के आना पड़ा. लेकिन दौ लड़कियों को एक साथ चौदने का माहौल और दो महीन चला. फिर मेरी नौकरी चली गयी और मुझे दुसरे शहर जाना पड़ा तो हमेशा की तरह दूसरी लडकियां ढूंढनी पडी. कभी मौका लगा तो इन लड़कियों की चुदाई की और भी कहानियां सुनाऊँगा.

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ऑफिस की लड़कियों की चुदाई – ४: चार मम्मे एक लंड

March 11, 2011 Leave a comment

उस रात ऑफिस के बाद हम तीनों अलग अलग अपने घर गए, तैयार हुए और डिन्नर के लिए एक रेस्टोरंट में मिलना तय हुआ. दोनों लडकियां एकदम सज धज के तैयार हो के आयी थी. एकदम परियां लग रही थी. अखिला एकदम टाईट टी-शर्ट और टाईट सुपर-मिनी में एकदम भरपूर हरी भरी चुदाई के लिए तैयार अप्सरा लग रही थी तो दिया टाईट जींस शोर्ट्स और लो-कट टी-शर्ट में अपनी गौरी गौरी चमड़ी के चलते एकदम परी लग रही थी. कपडे ऐसे फिट आ रहे दोनों को के न तो टाईट लग रहे थे, ना ढीले, ऐसे जैसे के शरीर का ही हिस्सा हों. एक एक उभार, शरीर का उतार चढ़ाव ऊपर से नज़र आ रहा था. भूख तो किसे थी, तो थोडा बहुत खाया, फिर दिया और अखिला को अपने साथ घर वापिस लेने के लिए हम लोग कार में बैठे.  पूरे डिन्नर में दिया की चुदाई कैसे करनी है, सोचता रहा. खैर, कार में दिया मेरे पीछे बैठी थी और अखिला मेरे साथ पैसेंजर सीट पे. अपनी औटोमटिक ट्रांस मिशन के चलते गेअर बदलने की ज़रुरत थी नहीं, तो मेरा बायाँ हाथ फ्री था. सो मैंने गाडी शुरू कर के  अपना हाथ अखिला की  गोरी -चिट्टी और एकदम चिकनी चमचमाती  जाँघों पे रख दिया. मैंने अपना हाथ उसके जाँघों में फेरना शुरू कर दिया तो उसने भी अपना हाथ मेरे लंड पे रख दिया. मेरा लौड़ा पहले ही खडा हुआ था. मैं अपने आप को बता रहा था के थोड़ा धीरे धीरे नहीं तो घर पहुँचने से पहले माल ना निकल जाए. मैंने अपना हाथ ऊपर ले जाते हुए उसकी मिनी को ऊपर सरका दिया. मेरा हाथ ऊपर बढ़ता हुआ उसकी चूत के एकदम ऊपर पेंटी से जा टकराया. एकदम नर्म नर्म, गर्म गर्म और हल्की सी गीली चूत थी उसकी. मैं अपनी उंगली से उसकी चूत की लकीर पे लकीरें बनाता रहा. वो एकदम मद मस्त हो उठी. मैंने दिया से कहा – कभी अखिला के मम्मे पकडे हैं? उसने कहा- नहीं. मैंने कहा- पकड़ के देखो, कितने मजेदार हैं. उसने दूसरी और सरक के खट्टाक से अखिला के मम्मे पकड़ लिए. अखिला वासना से एकदम उत्तेजित हुई जा रही थी, सो आहें भरने लगी. मैंने दिया से बोला के हलके हलके दबाती रहो, तो उसने अखिला के मम्मे दबाने शुरू कर दिए. मैंने अपने हाथ से पेंटी को एक तरफ सरकाया, और उँगलियों से उसकी नंगी चूत को छू लिया. वो एकदम तड़प उठी. मैंने अपनी उंगली से उसकी चूत के होंठ को एक और खींचा, और हलके हलके से अपनी उंगली घुसा दी. उसने कस के मेरे हाथ को पकड़ लिया.

उसकी गीली चूत में मैं हलके हलके उंगली अन्दर बाहर करने लगा. पीछे से दिया उसके चूचे दबाये जा रही थी. अखिला अब चूत से चू सी रही थी और कांपने लगी. मैं उंगली और अंगूठे से उसकी चूत से छेड़खानी करता रहा. करते करते घर आ गया. अखिला ने अपने कपडे सीधे किये और कार से बाहर निकली. मेरा घर दूसरी मंजिल पे था, तो मैंने उन्हें आगे आगे कर दिया और उनके पीछे पीछे उनकी गांड मचलते हुए देखते हुए ऊपर चढ़ गया. मैंने ऊपर आ के दरवाजा खोला और हम तीनों अन्दर चले आये. अन्दर घुसते ही तीनों ने एक साथ किस्स किया. मैं थोडा पीछे हट के दोनों लड़कियों को आपस में चुम्बन लेने के नज़ारे का आनंद लेने लगा. वो दोनों आँखें बंद कर के इतने प्यार से एक दुसरे को किस्स कर रही थी के दिल किया के दोनों के होंठों के बीच में अपना लंड दे दूं. आपस में किस्स करते करते दोनों लडकियां एक दुसरे के काफी नज़दीक आ गयी. दिया ने अपना हाथ उठाया और अखिला की बाजू को हलके से छुआ, फिर हलके से उसकी बाजू पे हाथ फेरते हुए उस के नजदीक आ गयी. अब दोनों के मम्मे आपस में टकरा रहे थे. मैंने उन दोनों को ज्वाइन किया इस चुम्बन प्रक्रिया में. मैं दोनों के होंठ बड़ी देर तक चूसता रहा. मैंने एक हाथ अखिला की कमर पे रखा और दूसरा दिया की कमर पे और उन की कमर सहलाते हुए अपना हाथ दोनों की रीढ़ पे दौडाते हुए उनकी गांडों तक ले गया. किस्स करते करते मैं उनकी गांडे सहलाता रहा और फिर मैंने दोनों के कूल्हों को पकड़ के दबाना शुरू कर दिया. दोनों लडकियां मेरी और थोड़ी घूमी, और अब उनकी चूचियां मेरी छाती से भी लग रही थी. अखिला की उठी उठी एकदम तनी हुई चूचियां एक तरफ तो दूसरी और दिया की नाजुक नाजुक दूधिया चूचियां, जिन्हें मैंने अब तक देखा नहीं था.

करते करते दोनों लड़कियों के हाथ एक दुसरे के मम्मों पे पहुँच गए. मैंने दिया के शोर्ट्स की बटन खोली और नीचे खिसकानी शुरू कर दी. दुसरे हाथ से मैंने अखिला के गोल गुन्दाज़ कूल्हों को पकड़ा और मिनी स्किर्ट को ऊपर उठा के उसकी पेंटी पर हाथ रख के उसके नितम्बों को थाम के दबाने लगा. दिया ने अखिला की टी-शर्ट ऊपर उठाई. मैंने सोचा के दिया को मैं थोड़ी ज्यादा सीधी समझ रहा था, लेकिन दिया तेज है और अखिला इस सब चुदाव के बाद भी उतनी खुली नहीं है. ऐसा लग रहा था के मैं और दिया मिले के अखिला को चोद रहे हैं.

अखिला ने अन्दर बिना स्ट्रेप वाली ब्रा पहन राखी थी, जो बड़ी मुश्किल से उसके मोटे मोटे चूचों को अपने काबू में कर पा रही थी. मैंने झुक के उसके ब्रा के हुक खोल दिए और उसकी ब्रा निकाल के ज़मीन पे फ़ेंक डाली. उसके एकदम दूधिया और तने हुए चूचों को देख के न्यूटन की गुरुत्वाकर्षण शक्ति भी शर्मा जाए. उसके हलके गुलाबी रंग के निप्पल काफी बड़े और स्पंज की तरह नर्म नर्म थे. मैंने अपनी उँगलियों से उसके निप्पलों पे एक च्यूंटी मारी.दुसरे को दिया चूसने लगी. मैं दिया के पीछे जाके खडा हो गया और उसकी शोर्ट्स को नीचे उतारने लगा. उसकी शोर्ट्स उतार के मैं झुक के उसकी गांड को पेंटी के ऊपर ऊपर से चूमने लगा और हाथों से दबोच दबोच के दबाने लगा. फिर मैं उसकी पेंटी भी उतार दी. उसकी गांड नर्म नर्म थी और एकदम मॉडल जैसी शेप वाली, एकदम नाजुक मैंने उसके एक कूल्हे पर दाँतों से हलके से काटा, फिर थोड़े जोर से काटा लेकिन दिया ने उफ्फ़ तक न की. वो अखिला के मम्मों को दबाती, चबाती और चूसती रही. फिर मैंने अपनी पेंट और चड्ढी उतार फेंकी. मैं दिया के पीछे खडा हो गया. मेरा तना हुआ लंड मैंने उसके कूल्हों के बीच में रखा और उसके पीछे से उससे चिपट गया. फिर मैंने अपने हाथ सामने डाल के उसके टी-शर्ट में हाथ दे दिए. थोड़ी देर मैं टी-शर्ट में हाथ डाल के उसने नर्म नर्म चूचे दबाता रहा और उसके सख्त निप्पल पे च्यूंटी काटने लगा. दिया भी अखिला की तरह आहें भरने लगी. करते करते मैंने दिया की टी-शर्ट भी उतार फेंकी. फिर मैंने अपने उसके पीछे खड़े खड़े अपने हाथों से उसके दोनों कूल्हों को थामा और थोडा चौड़ा किया. मेरा लंड अब और ज्यादा आराम से उसके कूल्हों के बीच में बैठा था.

(बाकी अगले अंक में)

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ऑफिस की लडकीयों की चुदाई – 3 : दिया के मुंह में दिया

March 8, 2011 Leave a comment

बॉम्बे से आने के बाद चुदाई का माहौल थोडा मस्त हो गया था. उस शनिवार रात को फिर अखिला के साथ घूमने का प्लान बना, जिसका अंत भरपूर चुदाई में हुआ. उसके मोटे मोटे मस्त मम्मों पे लंड रगड़ने की याद से लौड़ा हर बार सख्त हो जाता है. लेकिन असली मजा अगले हफ्ते काम पे शुरू हुआ. मैंने सुबह सुबह हमेशा की तरह अखिला को अपने कमरे में बुलाया और कुछ जापानी कागज़ खोल के बैठ गया. दोनों ड्राईंग देखने के बहाने आस पास बैठे रहे. सामने डेस्क पे कंप्यूटर और उसके पीछे मैं और अखिला आस पास कुर्सियों पे बैठे बैठे एकदम नजदीक आ गए. थोड़ी देर में मेरा हाथ उसकी टांग पर जा पहुंचा, उसने अपनी टाँगे थोड़ी खोली फिर उसका हाथ भी मेरे जांघ पे आ टिका. मैंने उसका हाथ पकड़ा के अपने खड़े लौड़े के ऊपर ला रखा. अखिला ऊपर ही ऊपर से हलके हलके मेरे लंड को पुचकारने लगी. लंड और सख्त होता गया. मैंने उसकी टांगों के बीच में अपना हाथ और अन्दर पहुंचा दिया, लेकिन अब तक चूत तक न पहुँच पाया था के दरवाज़ा खुला और दिया अन्दर आ गयी. हालाँकि वो मेरे डेस्क के सामने से ये सब नहीं देख सकती थी, लेकिन अचानक उसके आने से मैं चौंका और मैंने अपना हाथ अखिला की रानों से हटा लिया. लेकिन अखिला में मेरे लौड़े से छेडछाड चालू रखी. दिया थोड़ी इधर उधर की बात करने लगी, फिर मेरे डेस्क के झुक के बातें करने लगी – पूछा के पिछले हफ्ते की ट्रिप कैसी रही, वगैरह. उस दिन उसने कुछ ज्यादा ही लो-कट टी-शर्ट पहन रखी थी. उसकी ब्रा का तो पता नहीं चला लेकिन जब वो मेरे सामने झुकी तो उसके मम्मों के भीतर तक सब नज़र आने लगा. मेरी नज़रें उसके मम्मों की दुधिया त्वचा से फिसलती उसके मम्मों के बीच में आ टिकी. उसने झुके झुके अपने एक बाजू को अपने मम्मों के नीचे से यूँ लपेटा के मम्मे और उभर के बाहर आने लगे. इधर अखिला मेरी और कनखियों के देख के मुस्कराने लगी और उसने मुठियाना जारी रखा. मुझसे और झेला न जा रहा था और थोड़ी देर में मेरे मुंह से शब्द निकलने बंद हो गए. दिया ने पूछा- सब ठीक तो है, बॉस. मैंने कहा- हाँ, थोड़ी देर में आओ, लेकिन उसने गुफ्तगू चालू रखी. अब मेरा दिल कर रहा था के टेबल के उपर से लपक के उसकी चूचियों से चिमट जाऊं, लेकिन हिम्मत न हुई. ऐसा बहुत बार हुआ है के मैं लड़कियों की फ्लिर्टिंग का गलत मतलब ले बैठा और बेकार में चांटा खा बैठा. वैसे भी, काम पे ये सब. सो लौड़े के उफान पे शान्ति तब आयी जब मेरा वीर्य आखिर बाहर निकला. अखिला ने हलके हलके सहलाना जारी रखा. मैं बड़ी मुश्किल से हांफने पे काबू रख पा रहा था. मैंने ऊपर देख के आँखें बंद कर ली. हिम्मत नहीं हुई के आँखें खोलूँ लेकिन जब खोली तो दिया सामने मुस्करा रही थी और अखिला अभी भी मेरे भीगे लौड़े को सहला रही थी.

आँखें खोली तो देखा दिया मेरे बाजू में खड़ी थी. और अखिला अभी भी मेरा लंड सहला रही थी. दिया बोली – “बॉस, मैं भी कुछ मदद करूँ?” मैं थोडा हकलाया सा, लेकिन मेरा अश्लील दिमाग तुरंत समझ गया के इनकी मिली-भगत है. मैं अखिला की तरफ देख के मुस्कराया. मुझे अपनी किस्मत पे भरोसा नहीं हो रहा था. अब अखिला अपनी सीट से खड़ी हो गयी और दिया से बोली- “लो अब तुम्ही संभालो, अगर कुछ बचा हो”, कहके हंसी. मेरा लंड हलके हलके से फिर सख्त होना शुरू होने लगा. अब दिया मेरे बाजू में बैठी और अखिला मेरे पीछे खड़ी हो गयी. ऑफिस में चुदाई का तो माहौल बिलकुल नहीं हो पाता, लेकिन लड़कियों से टेबल के पीछे पीछे मुठीयाने से अगर कोई गलती से कमरे में आ भी जाता तो देख नहीं पाता. अब अखिला मेरे पीछे एकदम मेरे कंधे के साथ मम्मे लगा के खड़ी हो गयी. दिया मेरे साथ बैठ के मेरा लंड ऊपर ऊपर से सहलाने लगी. लंड अभी भी एकदम नर्म था. मैंने आव देखा न ताव कस के उसकी चूचियां दबोच ली. एकदम नर्म नर्म कोमल कोमल चूचियों को छू के हाथों में लर्जन सी उठ गयी. इतने जोर से चूचियां दबाई के दिया उफ्फ़ कर उठी. बोली- कोई आ जाएगा. मैंने कहा- ठीक है, लेकिन बाद में प्रोग्राम बनाना पड़ेगा. वो मेरे बैठे लौड़े को सहलाते हुए बोली, ठीक है, लेकिन मैं अकेली नहीं चलने वाली. कहके उसने अखिला की और देखा. मैंने कहा, “हाँ हाँ, तीनों चलेंगे”. जैसे मैं एहसान कर रहा हूँ. मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे, लेकिन लौड़े में अभी भी सख्ती नहीं आयी थी. वो थोड़ी देर उपर से सहलाती रही, फिर उसने लंड को थोडा टटोला. मैंने पीछे से उसकी जींस में हाथ दे दिया. उसने अन्दर बहुत ही टाईट पेंटी पहन रखी थी. उसने अपनी गांड ऊपर को उठायी पर मेरा हाथ ज्यादा अन्दर न जा पाया. दिया ने लंड टटोल के पकड़ा तो लंड में थोडा जोश सा आया. मैंने घूम के अखिला के मम्मे पे ऊपर ऊपर से अपने होंठों से हलके से चुस्की ली. लौड़े में ऐसी झनझनाहट सी उठी के दिया ने भी महसूस किया. उसने हलके से मेरे लंड को दबाया फिर उसने हलके हलके से अपने हाथ से लंड दबा के अपना हाथ ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया. लौड़े में सख्ती धीरे धीरे बढ़ती गयी. एक मुठ लगाने के बाद दूसरी मुट्ठ में और भी ज्यादा आता है, इससे तो आप सहमत ही होंगे. तो ऐसी ही कुछ अपनी हालत थी. हर हलके हलके झटके से लौड़ा और उठा जा रहा था और मेरे शरीर की सारी गर्मी जैसे लौड़े में समा रही थी. मैंने अपना हाथ दिया की जींस में से निकल कर उसकी गांड के नीचे दे दिया और उसके कूल्हों को हौले हौले दबाने लगा. वो बहुत हलके हलके से सिस्कारियां लेने लगी. पीछे से अखिला मेरे कानों में हौले हौले से बोलने लगी – “बॉस, मजा आ रहा है ना”. मैं हकलाते हकलाते कुछ तो बोला हूँगा. मैंने दिया की गांड थोड़े जोर से दबानी शुरू कर दी, उसने भी मेरे लौड़े पे दबाव थोड़ा बढ़ा दिया. फिर वो मेरे कान में हलके हलके सिस्कारियां लेते हुए बोली- “बॉस, थोड़ा और जोर से, हाँ, मजा आ रहा है, वैसे ही करो जैसे अखिला के साथ किया था” मैंने हाँफते हाँफते कहा- “ज़रूर, आज रात एकदम”. कह के मैंने अपना मुंह ज़रा घुमाया और अखिला के मम्मों पे रगड़ने लगा, वो भी हल्की हल्की सिस्कारियां लेते हुए बोली- “बॉस, हम लोग कब से सोच रहे थे के तुम कोई शुरुआत करो, लेकिन तुम तो एकदम शर्मीले निकले, हमें ही करना पड़ा”. मैंने मन ही मन सोचा- “ठीक है, ऐसा सोचती है तो बढ़िया है, लेकिन मेरे से जो पूरी रात गांड मरवाई, वो मेरी शर्म का सबूत तो नहीं है”. खैर, दिया के हाथों में तेजी आती रही और मेरे लंड ने उठान मारनी शुरू कर दी. मैं ज़ोरों से दिया की गांड दबाता रहा. जींस के बाहर से भी उसकी टाईट पेंटी का साफ़ पता चल रहा था और उसकी गांड बड़ी सख्त महसूस हो रही थी. फिर दिया अपना हाथ मेरे लौड़े के एकदम निचले सिरे पे ले आयी और मैं एकदम मस्त हो गया. उसने जोर से अपने हाथों को मेरे लौड़े के निचले हिस्से पे कसा और दबाव और बढ़ा दिया, जैसे के निचोड़ रही हो. मैंने सिसकी सी लेते हुए कहा- “पूरा निचोड़ डालोगी, जानेमन”. दिया हंसी और बोली -”बॉस, जो काम आपने पकडाया है, पूरा करके ही रुकुंगी”. अखिला हंस पडी. मुझे थोड़ी करतूत सूझी. मैंने अखिला से कहा – “ज़रा दरवाजे पे खड़ी हो जाओ और नज़र रखो”. अखिला को मेरी खुराफात समझ में तो नहीं आयी लेकिन वो दरवाजे के पास खड़ी होके एक फाइल पढने की एक्टिंग करने लगी. मैंने अपनी पेंट की चैन खोली, चड्ढी नीचे सरकाई और अपने खड़े लंड को बाहर निकाला, फिर दिया का हाथ लेके अपना लंड उस में थाम दिया. फिर मैंने दिया से पूछा- “कुल्फी चलेगी?” दिया ने मेरी तरफ प्रशन्वाचक अंदाज़ से देखा, मैंने कुल्फी चूसने का मुंह बनाया और उसकी समझ में आ गया. बोली -”यहाँ?”. मैंने कहा -”हाँ मेरी जान, चिन्ता मत करो, दिया दरवाजे पे खड़ी है”. दिया नीचे फर्श पे घुटने लगा के बैठ गयी, फिर उसने मेरी टांगों को थोड़ा खोला और ठीक टांगों के बीच में बैठ गयी. जहां मैं बैठा था, वहाँ से मेरे और दिया के चेहरे के बीच में मेरा खडा लंड नज़र आ रहा था. उसने अपने हाथ से मेरे लंड को थोडा सा अपनी और खींचा और छोड़ दिया जैसे के गिटार की तार से छेड़ की हो. मेरा लौड़ा थोड़ी देर आगे पीछे होता रहा. एक सिरहन सी मेरे पेट से ले के लौड़े के सिरे तक दौड़ गयी. फिर दिया ने अपना हाथ ले के मेरे लौड़े की त्वचा को थोडा नीचे सरकाया और मेरा लाल सुपाड़ा एकदम बाहर निकल आया. फिर दिया ने हलके से मेरे सुपाडे पे पप्पी जड़ दी. आनंद से मेरी आँखें बंद हो उठी. मैंने अपना हाथ दिया के सर पे फिराया. मैंने आँखें खोली. उसके सुन्दर मासूम चेहरे पे शरारत लिखी हुई थी. हमारी आँखें एक दुसरे से मिली, मैं मुस्कुराया और मैंने अपने हाथ से उसके मुंह को अपने तने हुए लौड़े की ओर खींचा.

उसने हलके से ट्टटों के बीच में किस्स किया, फिर हलके हलके ऊपर आते आते मेरे तने हुए लंड के नीचे किस्स करते करते ऊपर सुपाडे की और आना ज़ारी रखा. उसके हर चुम्बन के साथ मेरे लौड़े को जैसे बिजली का झटका सा लगता था. उसके चुम्बन भी ऐसे, होंठ हलके हलके खुले हुए, एकदम नर्म नर्म गद्देदार और हलके से गीले गीले. ऐसे चुम्बन ले रही थी जैसे थोडा सा भी लंड पे दबाव डाला तो लंड टूट जाए. उसके गर्म गर्म सांस मेरे लंड से टकरा रहे थे. जैसे जैसे वो मेरे लौड़े के सुपाडे के नजदीक आती रही, मेरे लौड़े की छलांगें बढ़ती गयी. फिर उसने मेरे सुपाडे के ठीक नीचे पप्पी ली और रुक कर मेरी तरफ देखने लगी. मेरा लौड़ा सांस के साथ ऊपर को उठा, और सांस के साथ नीचे आ के उसके होठों से टकराया, उसके होंठ थोड़े खुले थे, वो मुस्कुराई. फिर उसने अपनी जीभ बाहर निकाली और मेरी गेंदों से ले के सुपाडे तक चाटती हुई आयी. फिर उसने मेरे सुपाडे के इर्द गिर्द अपनी जीभ घुमाई. मेरी आह सी निकली. मैं बोला- “वो, तुम तो एकदम एक्सपर्ट निकली”. उसने जवाब देने के लिए अपना सर पीछे हटाने की कोशिश की लेकिन मेरे हाथ ने उसे मेरे लौड़े से जुदा न होने दिया. मैंने कहा- “काम जारी रखो, डार्लिंग”. अब उसने अपनी जीभ मेरे सुपाडे के इर्द गिर्द घुमा के मेरे लंड के छेड़ पे लगा दी. फिर जीभ उठाने गिराने लगी और मेरे लंड से और सहा नहीं जा रहा था. मेरे लंड से हल्की सी चिकनाहट निकली और उसकी जीभ से लगी. उसने चाटना जारी रखा. फिर उसने अपना मुंह खोला और मेरे लंड को अपने नर्म नर्म होंठों के आगोश में दबोच लिया. इतना जोर से लंड चूसा के मेरी जोर से आह निकल उठी. दरवाजे पे खादी अखिला ने भी आवाज सुन के पलट के देखा, लेकिन इस हालत में अब मेरा खुद पे काबू नहीं था.

वो लौड़े को चूसने लगी और मुंह के अन्दर ही अन्दर से अपनी जीभ मेरे पंड पे घुमाने लगी. मैंने झुक के उसकी कमीज़ में हाथ डाल दिया, लेकिन उसकी ब्रा में हाथ डालना थोडा मुश्किल प्रतीत हुआ. मैंने उसका एंगेल थोडा अडजस्ट किया. अब मेरा हाथ उसकी ब्रा के अन्दर जा पा रहा था. मेरा हाथ उसके नर्म नर्म मम्मों पे फिसलता हुआ उसके चूश्कों तक पहुँच गया. अखिला के निप्पल भरे भरे और एकदम नर्म थे लेकिन दिया के निप्पल एकदम सख्त थे. मैंने उसके निप्पलों के चारों और अपनी उंगलियाँ फिराई और निप्पलों को अपने अंगूठे और तर्जनी उंगली के बीच में पकड़ लिया. हल्की सी सिस्कारे के साथ दिया ने लौड़े को थोडा और अपने मुंह में घुसेड़ा और बचे हुए लंड को हाथ में पकड़ के हलके हलकेसे मुठीयाने लगी. मैंने उसके हाथ हटा दिए और बोला- “जानेमन, मुंह से करो खाली. हाथ तो मैं भी हिला लेता हूँ.” सुन कर दिया ने लौड़े को और मुंह में घुसेड़ा और थोडा और ज़ोरों से चूसना शुरू कर दिया. फिर उसने अपना सर आगे पीछे करना शुरू किया. उसके मुंह की गर्माइश में लौड़ा एकदम सातवें आसमान पे जा पहुंचा था. बीच में दिया एक बार रुकी, लंड को हाथों में पकड़ा और चारों और से चूमा, चाटा और फिर मुंह में ले लिया. फिर वो ज़ोरों से अपने मुंह में मेरे लंड को अन्दर बाहर करने लगी. मैं इधर उसके मम्मों से खेले जा रहा था. बीच बीच में हलके से उसके निप्पलों पे च्यूंटी मार देता. मेरा लौड़ा अब किसी भी सेकंड सामान विसर्जन करने वाला था. मैंने दिया के सर पे हाथ रखा, मुंह आसमान की और किया और उसके हलक में अपना गरम गरम माल उतार दिया. दिया ने चूसना बंद किया और अपना सर पीछे करना चाहा लेकिन मैं आँखें बंद करके उसके सर को पकडे कोई दो मिनट तक बैठा रहा. जब मेरा सामान सब निकल चुका था, दिया ने हलके हलके से लंड को फिर चूसना शुरू किया. मेरे मुंह से लगातार एक लम्बी आह निकलती रही.

थोड़ी देर बाद दिया ने अपने मुंह से मेरा लंड बाहर निकाला. उसने मेरा लंड इतने ढंग से साफ़ किया था के एकदम सूखा सूखा सा लग रहा था. लंड के सिरे पे एक और बूँद सी निकल आयी. मैंने उसके होठों पे थोड़ी देर लंड रगडा. इतनी मस्त फीलिंग थी के बयान नहीं कर सकता. फिर मैंने थोड़ी देर उसके गाल पे लंड रखा. जी कर रहा था के पूरी उम्र उसके मुंह पे लंड रगड़ता रहूँ लेकिन अखिला खांस उठी. मैंने तुरंत अपनी पेंट की चैन बंद की, दिया जो एक नेपकिन ढून्ढ रही थी मेरे वीर्य को अपने मुंह से उगलने के लिए, होंठ भींच के बैठ गयी. बेचारी पे थोडा तरस आया, क्यूंकि मेरे ओफ्फिस में आने वाला प्राणी कोई १० मिनट तक मुझसे बात करता रहा और बीच में दिया को जवाब देना पड़ा. उस दिन दिया को मेरे वीर्य का घूँट पीना पड़ा, वो भी ओफ्फिस के दुसरे बन्दे के सामने.
आज सिर्फ इतनी कहानी दोस्तों. मेरा लंड फिर खड़ा हो गया है और चुदाई या मुठ का माहौल है, सो अब विदा. अगले अंक में, आप समझ ही गए होंगे, के दिया अच्छे से चुदने वाली है.

(being updated)

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वियत्नामी लडकी की दास्ताँ

February 24, 2011 Leave a comment

मेरी दौ-चार कहानियाँ सुनके आप को लगता होगा के मैं ने जिसे चाहा, चौद डाला. ऐसी बात नहीं है. पिछली बार मेरी कहानी कुछ ज्यादा ही गर्म हो गयी थी, तो इस बार मैं थोडा खड़े लंड पे धोखा करने वाला हूँ, पूरा नहीं, लेकिन काफी.

ये कहानी उन दिनों की है जब मैं अमेरिका में एक प्रोजेक्ट पे गया हुआ था. मैंने कहानियां बहुत सुनी थी के मस्साज पार्लर के नाम पे रंडी गिरी चलती है. काफी रिसर्च के बाद समझ में आया के बहुत रिस्की मामला है, दूर रहो. ये भी पता चला के ज्यादातर बुजुर्ग चीनी या कोरियन महिलाएं काम करती हैं ऐसी जगहों पे. अपुन को कमसिन लड़कियां – १९-२० से २८-३० साल तक की रेंज में पसंद आती हैं. लेकिन एक दिन खाने के बाद वापिस होटल आते हुए एक सलून के खिड़की से नज़र पडी एक बहुत ही सुन्दर २२-२३ साल की चीनी टाइप लडकी काउंटर पे बैठी थी बाद में उसने खुद ही बताया था के उसके माँ-बाप वियत नाम के हैं. दूकान सामने से पूरी शीशे की थी तो अन्दर सब साफ़ दिख रहा था. सामने ३-४ हेयर-ड्रेससिंग वाली कुर्सियां थी, एक तरफ काउन्टर. सो, सामने से कुछ ऐसा नहीं के गलत काम हो रहा हो. मैंने सोचा बाल कटा लेते हैं लौंडिया से, अपने हिंदुस्तान में कहाँ ऐसी माल लडकियां बाल काटती हैं. फिर मेरी नज़र सामने वाले साइन पे पडी – दूकान का नाम था – “फुल सर्विस सलोन”. नीचे एक जगह लिखा था – एक घंटे का म्स्साज ४० डालर. मैं थोडा तेज़ तेज़ चल रहा था और मुझे कुछ काम भी था, इसलिए मैं अन्दर नहीं गया. ऊपर से जगह भी ऐसी नहीं लगी के वहाँ रंडी गिरी होती हो. अधिकतर ऐसी जगहों का सामने से शीशा काला होता है. मैं होटल गया, इंटर नेट पे ढूँढा जगह के बारे में, तो ज्यादा कुछ मिला नहीं. मैंने सोचा अगले दिन ट्राई मारता हूँ – और कुछ नहीं तो एक दम माल लडकी से पूरे शरीर की मालिश ही करवा लूँगा.

सो अगले दिन मैं उसकी दूकान में पहुँच गया. वही लडकी. आज भी याद है के उसने एक मैरून रंग की शर्ट और जींस स्कर्ट पहन राखी थी. कोई और ग्राहक था नहीं, सो मैंने उस से कहा के म्स्साज करवाना है. बाकी बातें अंग्रेजी में हुई लेकिन मैं आप लोगों के लिए हिंदी में लिखूंगा. उसने पूछा – कहाँ से पता चला, क्रेग लिस्ट se? मैंने झूठ बोला – हाँ. फिर ठीक है – १० डालर की छूट. मैंने सोचा, तेरे मम्मे मसलने के तो १०० डालर भी दे दूं, जालिम. खैर, बहुत ही माल लडकी, बालों में थोडा “ब्लोंड” हाई लाइट कर रखा था, कद कुछ ५-४ टाइप. एकदम चीकनी. उसने अपना नाम बताया – लिली. उसकी आवाज़ इतनी मीठी जैसे शहद टपक रहा हो. मैं एकदम सेंटी हो गया. मैं तो तैयार था खाली म्स्साज करवा के होटल जाने को और मुठीयाने को, लेकिन जब उसने सलून का मुख्य दरवाजा बंद करके पर्दा लगा दिया, तो मेरी कुछ उम्मीद बढ़ी.

वो मुझे पीछे एक कमरे में ले गयी, जहां एक म्स्साज टेबल था, बोली के कपडे उतार के मुंह नीचे करके लेट जाओ. बोल के वो बाहर चली गयी और दरवाजा पीछे से बंद. मैंने सोचा चड्ढी उतारूं के नहीं. फिर सोचा, उतार के देखता हूँ क्या बोलती है, ज्यादा से ज्यादा पहनने को बोलेगी. उस समय मुझे नहीं मालूम था के लोग ज्यादातर एकदम नंगे ही म्स्साज करवाते हैं.  मैं चड्ढी उतार के मुंह नीचे करके लेट गया. एक छोटा सा तौलिया अपने चूतड पे डाल लिया, क्यूंकि टेबल पे पड़ा था. खैर, थोड़ी देर बाद दरवाजे पे दस्तक दे के लिली कमरे में आयी. पूछा हल्का के भारी म्स्साज, मैंने कहा भारी, सोचा के इतनी पतली और नाजुक सी लडकी क्या भारी कर पायेगी. कितना गलत था मैं! खैर, मेरे हाथों से उसका बीच बीच में हल्का हल्का स्पर्श बन जाए सोच के मैंने अपने हाथ टेबल के दोनों और डाल दिए, ताकि वो इधर उधर चले तो इस मुद्रा में आये के यहाँ खादी हो तो उसकी टांगों से थोडा स्पर्श होगा. मैं पूरा खिलाड़ी हूँ, पूरा काम भी करता हूँ और ऐसी छोटी छोटी खुशियों को भी हाथ से जाने नहीं देता.

तो दोस्तों, लिली ने मेरी कमर का मस्साज शुरू कर दिया, पहले दायीं और आयी और मेरे हाथों की पोजीशन एकदम उसकी टांगों के बीचों में. मेरे हाथ हलके हलके से उसकी टांगों के बीच में लटकते रहे और वो जोर लगा लगा के मेरी हड्डीयां तौडती रही. एक बार मैंने अपने हाथ को ज़रा सा घुमा के उसकी पिंडलियों को हल्का हल्का सा छूना शुरू कर दिया. थोड़ी देर बाद वो दूसरी तरफ आयी, वही कहानी. मेरा लंड मेरे नीचे दबा अब उठने लगा. अब मुझे लौड़े को ठीक करना पड़ेगा सोच के थोड़ी शर्म सी आयी. खैर, वो मेरी कमर की मालिश करके मेरी टांगों की और गयी तो मैंने अपने कुल्हे उठा के अपना हाथ डाल के लंड अडजस्ट कर लिया. सोचा के अब ये हाथ नहीं लगने देगी, इसको समझ में आ गया होगा के हरामी आदमी आया हुआ है. लेकिन ऐसा कुछ न हुआ. उसने मेरी टांगों की मालिश करते करते अपना हाथ मेरी जाँघों तक लाना शुरू कर दिया. एक दौ बार तो इतना ऊपर और इतना अन्दर के मेरे नीचे मुड़े हुए लौड़े से मुलाक़ात हो गयी. उसने मेरे कूल्हों से तौलिया हटाया और जम के पीछे से मालिश की. आनंद आ गया! फिर मेरी अँगुलियों की मालिश करते हुए जब उसने बल निकलने शुरू किये तो पूरे अपने मम्मों तक ले जाती. उसके शरीर की गर्मी से मेरे लौड़े में आग सी लगी हुई थी.
अब उसने मुझे पलटने को बोला और मैं पलट गया. मेरा लौदा एकदम तन के उठ गया. लिली हंसी और मुझे झेंप सी आ गयी. उसके बाद वो मेरे सर के पीछे खडी होके मेरी छाती की मालिश करने लगी तो उसके मम्मे मेरे मुंह के नजदीक आ जाते. अब मेरी झिझक थोड़ी दूर हुई तो मैंने उसके मम्मों को देखना शुरू कर दिया और लौड़ा ज़ोरों से अंगडाई लेने लगा. उसने मेरे लंड की तरफ इशारा किया, फिर अपने हाथों से मुठ लगाने वाला पोज बनाया और पूछा – करना है क्या? मुझे अपनी किस्मत पे यकीन नहीं हुआ. मैंने कहा हाँ हाँ, वो भी मस्साज में है क्या? उसने कहा- टिप देनी पड़ेगी. मैंने कहा- ठीक है. मैंने पूछा – मैं तुम्हे छू सकता हूँ. तो वो बोली- थोडा थोडा ठीक है. बस, फिर क्या था, मैं बिस्तर पे पड़े पड़े कभी उसकी गांड दबा रहा हूँ कभी उसके मम्मे और वो मेरी मालिश में लगी है. फिर आखिर मेरे लौड़े को उसने हाथ से पकड़ लिया. मैंने कहा- मुंह में ले लो. वो बोली- नहीं मैं वो सब नहीं करती. मैंने कहा, ठीक है, कम से कम अपनी चूची तो दिखा – १०० डालर दूंगा. उसकी आँखों में चमक सी आ गयी. बोली – १०० डालर मम्मे दिखाने के. मैंने कहा – हाँ.
उसने अपनी शर्ट खोली और इतने सुन्दर और कसे हुए चूचे मैंने पहले कभी नहीं देखे थे. वो पतली थी लेकिन मम्मे उसके साइज़ के हिसाब से एकदम सही. और पकडे तो बाप रे – इतने कसे हुए. वो मुझे मुठिया रही थी और मैं उसके चूचे ज़ोरों से दबा रहा था. वो बोली- इतने जोर से नहीं. लेकिन मैं न माना. फिर मैंने उसके पेट पे हाथ फिरना शुरू कर दिया. उसने पीयर्स करवा रखा था, इतना  टाईट पेट और ऊपर से पीयर्सिंग , लौड़ा एकदम काबू में नहीं आ रहा था. मैं जोर जोर से उसके मम्मे दबाता, कभी उसकी स्कर्ट में हाथ डाल डाल के उसकी गांड दबाता तो कभी चूत पे उंगली फेरता. फिर मैंने उसको अपनी और खींचा और चूचे को मुंह में लेने की कोशिश की, लेकिन उसने मना कर दिया. मैंने भी एक न सूनी और जोर से उसे अपनी और खींच के उसके चूचे पे मुंह लगा दिया. दुसरे हाथ से उसका दूसरा चूचा जम के दबाया और अपने उलटे हाथ को उसकी स्कर्ट में दे के पीछे से जोर से गांड दबानी ज़ारी राखी. उसने भी मुठियाना तेज कर दिया. मैंने फिर पूछा के लौड़ा चूसेगी, उसने फिर मना कर दिया. मेरा माल निकलने वाला था के मैंने उसकी चूची को बेहद जोर से भींचा. वो चिल्ला सी उठी और मेरा माल निकल के उसके हाथों पे चिपक गया. वो थोड़ी देर हलके हलके से मेरा माल बाहर निकालती रही और मैं आँखें बंद करके उसके कूल्हे और मम्मे को जोर से भींचता रहा. फिर वो बोली – एक मिनट में आती हूँ. मैं लेटा रहा और वो एक गरम तौलिया लेके आयी. फिर उसने गरम तौलिये से मेरा लंड साफ़ किया. फिर वो एक और गरम तौलिया ले के आयी और उसने मेरे सारे शरीर से तेल साफ़ किया. मैं बहुत खुश खुश बाहर निकला. उसने अपना कार्ड दिया के कभी दुबारा आना हो. मैंने सोचा पास में ही रहता हूँ, फिर आ ही जाऊंगा और कार्ड फ़ेंक दिया. उस के बाद मैं कुछ दिनों तक उसका चक्कर लगा नहीं पाया. जब चक्कर लगा तो देखा के सलून बंद है और किराए के लिए खाली है. मैंने अपना सर पीट लिया. वो एक लडकी थी, जो चुद सकती थी लेकिन मैं चौद न पाया.
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ऑफिस की लड़कियों की चुदाई – 2

February 22, 2011 Leave a comment

(contd from previous post)

तो दोस्तों, हम बॉम्बे अखिला के साथ पहुँच गए. दिन में क्या हुआ, उसमें तो आपका इंटरेस्ट होगा नहीं, सो रात की बात करते हैं. अखिला मेरे और शिल्पा के साथ पार्टी में जाने को तैयार हो गयी. पार्टी थी एक फाइव स्टार होटल में प्राइवेट पार्टी, जिसमें मॉडल, बी-ग्रेड एक्टर और दल्ले टाइप लोग आते हैं. बाहर वाले को लगेगा के काफी हाई-फाई पार्टी हाई, लेकिन ये ज्यादातर लोग जान पहचान के लिए आये हुए थे. लडकियां इसलिए के कहीं कोई प्रोडूसर देख ले, रात में चुदाई हो जाए और शायद किसी मूवी में ब्रेक मिल जाए, लड़के भी शायद इसी उम्मीद से आते हों. हमने उसी होटल में रात के दौ कमरे बुक कर लिए.

डिन्नर के बाद हम पार्टी पहुंचे और थोड़े ड्रिंक्स के बाद, जैसे म्यूजिक डांस टाइप होने लगा, जनता नाचने लगी. मैं और शिल्पा भी चिपक चिपक के डांस करने लगे. अखिला देख रही थी तो मैंने शिल्पा की गांड ज़रा सा दबा के अखिला की और देख के मुस्करा दिया. अगले गाने पे हम साइड में आ गए, एक और ड्रिंक के लिए. शिल्पा ने अखिला से पूछा – डांस करोगी. अखिला बोली- “पार्टनर नहीं है.” शिल्पा बोली- “चिंता न करो, आओ”. मैं साइड में अपना ड्रिंक पीता रहा और शिल्पा और अखिला एक दुसरे के सामने खड़े हो के थिरकने लगे. शिल्पा ने अखिला से कहा – “मालूम है, लड़कों को क्या पसंद आता है सबसे ज्यादा?” अखिला ने पूछा – “नहीं, बताओ”. शिल्पा ने कहा – “लडकियां एक दुसरे से चिपकते हुए.”
“सच्ची? लेस्बियन?”
“अरे यार, लेस्बियन नहीं, खाली चिपकती लडकियां, हिजड़ों का भी खड़ा हो जाए ये देख के”
अखिला थोड़ी चौंक गयी, लेकिन उसने सोचा होगा के हाई सोसायटी के लोग हैं, ऐसे ही बात करते होंगे.
शिल्पा ने अपना जाल फेंकना जारी रखा – “अभी तुम्हारे लिए डांस पार्टनर लाते हैं.” कहके उसने अपने एक हाथ से अखिला का हाथ पकड़ के बालरूम स्टाइल में अखिला को पकड़ लिया. जैसे ही दोनों के मम्मे आपस में टकराए, मेरा लौड़ा टनं खड़ा हो गया. थोड़ी देर दोनों ऐसे ही झूमती रही, फिर शिल्पा एकदम अखिला से चिपक गयी. अखिला की भी झिझक खुल गयी थी और वो मूड में आ गयी थी. दोनों एक दुसरे से चिपकी हुई थी और लोगों ने दोनों को घूरना शुरू कर दिया था. शिल्पा ने अपना हाथ अखिला की कमर के हिस्से में, जहां टॉप ख़त्म हो गया था और स्किर्ट शुरू नहीं हुआ था, यानी के नंगे हिस्से पे अपना हाथ फिराना शुरू कर दिया. मैंने सोचा मौका अच्छा है, अब बीच में घुस जाता हूँ, लेकिन इससे पहले के मैं पहुँच पाता, कोई और आ पहुंचा. वो ६ फुटा मोटा, काला शिल्पा का दल्ला.  मैं थोडा हैरान हुआ के ये यहाँ क्या कर रहा है, लेकिन थोडा पीछे हट गया. मैं दल्लों से कभी पंगे नहीं लेता.
दल्ले महाराज पीछे से नाचने की एक्टिंग करते हुए अखिला के पीछे तक जा पहुंचे. फिर झूमती हुई अखिला के कंधे पे हाथ रखा,और पीठ पर सरकाते हुए उसकी कमर में हाथ दाल दिया. अखिला थोडा दारु में, थोडा माहौल में और थोडा शिल्पा के जाल में मस्त हुई जा रही थी और उसने बिलकुल भी ध्यान न दिया. मैंने सोचा- चुद गयी आज तो ये, लेकिन मेरे से नहीं, इस मादरचोद दल्ले से. मैं सोचने लगा के क्या किया जाए.
इधर दल्ला अखिला की कमर में हाथ ड़ाल के पीछे से नाच रहा था, उधर शिल्पा सामने से. थोड़ी देर बाद शिल्पा पीछे हट गयी और एक और काला मोटा बंदा उस की जगह आ गया. अब अखिला बीच में मजे से झूम रही थी और एक हट्टा कट्टा मादरचोद उसके पीछे और एक सामने. धीरे धीरे करके दोनों उसके नजदीक आने लगे, इतने नजदीक के दोनों ने अपने अपने लौड़े से गांड पे पीछे से और उस के पेट पे आगे से रगडा रगडी करने लगे. सामने वाले ने एक हाथ से अखिला का हाथ पकड़ा और दुसरे से सामेंसे उसके कंधे पे हाथ यूँ रख लिया के पूरा बाजू अखिला के मम्मों से लगा रहे. पीछे वाले ने अपना हाथ कमर से नीचे सरका के अखिला के कूल्हे थाम लिए. दल्ला अब उसके कोमल कोमल कूल्हों को दबाने लगा और सामने वाले ने अपना हाथ नीचे करके उसके मम्मे दबोच लिए. देखने में मजा भी आ रहा था और सोच भी रहा था के कैसे बचाऊँ इसे. सारे ही लोग ऐसे चिपके हुए थे के किसी का ध्यान इनकी और जा नहीं रहा था, या फिर लोग जान बूझकर इन्हें अनदेखा कर रहे थे. मैंने सोचा साले अंडर वर्ल्ड के लोग न हों, कहाँ फंसा दिया बेचारी को. अब दोनों ने एकदम अखिला का सैंडविच बना लिया था और जोर जोर से रगड़े लगाने लगे. सामने वाले मौटे ने कई हफ़्तों की दाढी बना रखी थी, उसने अपनी दाढी अखिला के गालों पे रगडनी शुरू कर दी. अब अखिला थोड़ी बेचैन नज़र आने लगी. मैं आगे बढ़ा लेकिन शिल्पा ने रोक लिया. “ये क्या मजाक है?”, मैंने पूछा. “अरे, कोई नहीं, पूरा काम कर रही हूँ मियाँ, ये लडकी एकदम नयी है, अगर तुम इसकी लेने की कोशिश करते तो हरगिज़ कुछ न हो पाता और तुम्हारी नौकरी अलग मुश्किल में पद जाती, मेरे बन्दे इसको सेट कर देंगे फिर अपने बाप से भी चुदवा लेगी, बस मेरे साथ थोड़ी देर नाचते रहो और उसकी और देख के मुस्कुराते रगों. हम लोगों को आस पास देख के वो डरेगी नहीं.” कोई और चारा ना देख के मैं मान गया. अब सामने वाला भुसंड कहीं चला गया और पीछे वाला भुसंड अपना लंड मेरी अखिला की गांड पे लगा के उसकी कमर पकड़ के घिस्से लगाता रहा. फिर उस भुसंड ने पीछे से अखिला की कमर के चारों और अपनी बाहे लपेट दी, और घिस्से लगाना ज़ारी. अखिला ने हमारी और देखा, हम मुस्कराए, वो मुस्कराई और फिर मस्त हो गयी. दूसरे काले भुसंड का फिर आगमन हुआ, एक ड्रिंक ले के आया था अखिला के लिए. उसके बाद फिर अखिला को बीच में दबोच के दोनों बारी बारी मजे लेते रहे. फिर पीछे वाले दल्ले ने अपने घुटने मोड़ के अपने लंड को अखिला की गांड से सटाया, अपने हाथों को उसके इर्द गिर्द लपेटा और उठा लिया. तीनों हंसने लगे और सामने वाले चौदु ने अखिला के सैंडल पहने हुए  पाँव उठाये और दोनों मादरचोद अखिला को यूँ ऊपर नीचे करने लगे जैसे पीछे वाला उसकी गांड मार रहा हो. देख के मेरा लौड़ा तन गया और शिल्पा के पेट पे जा चुभा. शिल्पा ने कहा- देखा, हो गए न तुम भी तैयार. मैंने शिल्पा की गांड पकड़ी और दबाने लगा, फिर मैंने  आँख बंद करके दौ मिनट चुम्बन लिया होगा और आँख खुलते ही अखिला गायब, साथ में दोनों चौदु. मेरी गांड फट गयी, मैंने शिल्पा से पूछा, वो बोली- “ऊपर चलो, शिल्पा के रूम में. मुझे पता था तुम्हारे बस का नहीं है, इसलिए अपने दोस्तों को साथ लाई थी”

अब मेरे दिमाग की बत्ती जली, लेकिन मैं जब तक खुद देख न लेता, मानने वाला नहीं था. पुलिस की सोचता रहा, लेकिन सोचा के क्या बताऊंगा, कैसे लाया था शिल्पा को यहाँ. सो, कोई और चारा था नहीं. शिल्पा के साथ जल्दी जल्दी ऊपर जाके अखिला के कमरे में पहुंचे. दरवाजा खुला था और वाकई में दोनों चौदू अखिला के साथ उस कमरे में थे. मेरी सांस में सांस आयी. कमरे में हल्का हल्का सा म्यूजिक चल रहा था. दोनों दल्ले अखिला के घिस्से लगा रहे थे. दल्लों ने अपनी कमीजें उतार रखी थी, लेकिन अखिला ने अभी भी पूरे कपडे पहन रखे थे. अखिला अब एकदम मस्त हुई जा रही थी. मुझे देख के बोली, आ जाओ, मियाँ, आप ही की कमी थी. अब मैं और शिल्पा एक कौने में चिपट के चुम्मा छाती करने लगे और वो दोनों अखिला के शरीर के साथ खिलवाड़ करने लगे. थोडा ध्यान दिया तो देखा अखिला के सैंडल नहीं थे, अब वो नंगे पैर थी. फिर थोड़ी देर में, तीनों बिस्तर पे थे. दल्ला अभी भी पीछे से लौड़ा घिसा रहा था और कपड़ों के ऊपर से ही अखिला के मम्मे दबा रहा था जबकी सामने वाला पहलवान अपनी दाढी को अखिला के पेट से रगड़ रहा था. उसके पेट पे हलकी हलकी लाली नज़र आ रही थी.

अब सामने वाले पहलवान ने अखिला की टांगों पे हाथ फिराना शुरू कर दिया और अपना हाथ अखिला की स्किर्ट में ड़ाल दिया. स्कर्ट ऊपर उठती गयी, अखिला हंसती भी रही और सिस्कारियां भी भर्ती रही. शिल्पा ने मेरे हाथ में एक गोली पकड़ा दी- ये लो, वयाग्रा, घंटों लंड खड़ा रहेगा, ज़रुरत पड़ेगी, बोल के हंसी. मैंने सोचा, कहीं नींद की गोली न हो, फिर सोचा के अगर इन लोगों ने अखिला की लेनी होती तो अकेले अकेले भी ले लेते, मुझे ऊपर बुलाने की ज़रुरत नहीं थी. सोच के मैंने गोली चबा ली. लौड़ा वैसे ही फुन्कारें मार रहा था, इसलिए असर पता नहीं चला. इधर पहलवान ने अखिला की स्किर्ट उतार के उसकी पंटी उतार डाली. फिर पहलवान ने अखिला की चूत में उंगली डाली ही थी के अखिला ने बहुत जोर से आह भरी. मैंने अपनी पेंट खोली, चड्ढी उतारी और शिल्पा ने मेरा लंड पकड़ लिया. फिर शिल्पा बैठ के मेरे लंड को किस्स करने लगी. पहलवान और दल्ले ने भी अपना अपना लौड़ा निकला, और अखिला की टॉप और ब्रा खोल डाली. कमरे की लाइट में एकदम चांदनी जैसी खिल रही थी अखिला. मैरून रंग की चूत, शेव की हुई चूत, गदराई कमर और गदराये मम्मे, कम से कम ३६ साइज़ रहा होगा.अब पहलवान ने अपना लंड अखिला के होठों से रगड़ना शुरू कर दिया. अखिला ने मुंह हिला के लौड़े को चबाने की कोशिश तो की, लेकिन नाकाम रही. पहलवान ने अखिला की चूत में उंगली ड़ालते हुए इशारा किया- आ जाओ भाई. और मैंने आव देखा न ताव, लौड़ा अखिला की चूत के मुंह से लगाया और एक झटके में सर्र से अन्दर. अखिला चीख सी उठी. मैं जोर जोर से धक्के लगाने लगा.पीछे से नंगी होके शिल्पा भी आ गयी. उसने अपने मम्मों को मेरे मुंह पे रखा और जोर जोर से अखिला की चूचीया दबाने लगी. पहलवान ने शिल्पा को दबोच लिया और उसकी चूत में लंड घुसा दिया. दल्ले ने शिल्पा के मुंह में दे दिया, लेकिन नज़र सब की अखिला पे रही.
मैंने अखिला की चूत को तरह तरह के अंदाज़ में चौड़ा. उसके मम्मों को जोर से दबाया, चबाया, उधर से शिल्पा बार बार अखिला के निप्पल चबा रही थी. पहलवान रह रह के उसकी चूचियों पे च्यूंटी मार देता था. इतना क्रूर व्यवहार देख के मेरा लंड और सख्त हुआ जा रहा था. मैंने पहले अखिला को उसकी कमर पे लिटा के चौड़ा, फिर उसे कुत्ती बना के चौड़ा, फिर उसे साइड पे लिटा के चौदा. फिर उसका सर फर्श पे, और टाँगे बिस्तर पे, ऊपर नीचे करके चौदा. चौदते चौदते थक गया तो उसके मुंह में लंड ड़ाल के चुसाने लगा. फिर उसके मम्मों को अपने लंड पे रगडा. इस बीच पहलवान ने अपनी उंगली पे एक क्रीम लगा के अखिला की गांड में घुसेड दी. शिल्पा ने आँख मारी. इन सब को पता है के मैं गांड का कितना शौक़ीन हूँ, मैंने सोचा. फिर मैं अखिला को बिस्तर पे औंधा करके उसकी गांड से लौड़ा लगाया. अखिला ने आह भरी और मेरा लौड़ा सरकते सरकते घुसता चला गया.फिर मैंने जोर जोर से अपनी पंजाबन की गांड मारनी शुरू कर दी. मैं वहशी की तरह उसके चूचों को मसलता रहा, उधर से पहलवान अखिला के चूचे को अपनी और यूँ खींच रहा था के नोंच के अपने साथ ले जाएगा. इतने सुन्दर और टाईट चूचे, के पूछो मत. एकदम रुई जैसे निप्पल, पहले मैं हाथों से उसके निप्पल रगड़ता रहा, नोंचता रहा और चुंटी मारता रहा, फिर मैंने उसकी गांड से लंड निकला और निप्पल पे रगड़ता रहा. फिर मैंने उसकी गांड से निकला लंड उसके मुंह में ड़ाल दिया. “बहन की लौड़ी, इन दल्लों से चुदना चाहती थी ना, अब अपनी गांड का स्वाद चख”, मैंने सोचा, लेकिन कहा नहीं. ऐसा मैंने ३-४ बार किया. शिल्पा ने वायग्रा न दी होती तो कब का वीर्य निकल चूका होता, लेकिन लौड़े ने फुन्फ्कारें मारते हुए अखिला के तीनों छेदों- मुंह, गांड और चूत का बहुत बुरा हश्र बनाया. फिर मैंने सोचा के टू-इन-वन करते हैं, पहलवान को बुलाया, पहलवान ने कंडम पहना, फिर पहलवान नीचे लेता, अखिला उसके ऊपर, मुंह नीचे करके, पहलवान ने उसकी चूत में लौड़ा घुसाया और मैंने उसकी गांड में. फिर दोनों ने इतनी जोर से इतनी कास के पेला, के मज़ा आ गया. मेरे और पहलवान में हौड सी लगी थी के कौन जोर से चूची दबाता है और कौन जोर से गांड चौड़ी करता है और कौन जोर से धक्के लगता है. पहलवान ने भी वायग्रा ले रखी थी! हैरानी और ख़ुशी मुझे इस बात की होती रही के अखिला मज़े ले रही थी. अब मेरी पहलवान से ऐसी यारी हुई के इस के बाद कई और लड़कियों का उद्घाटन हम ऐसे ही करेंगे, लेकिन वो कहानी बाद में.
काफी देर तक चुदाई के बाद शिल्पा ने हमे ज्वाइन कर लिया. दल्ले ने अखिला के मुंह में लंड डाला और शिल्पा ने अखिला के दोनों हाथ ठाम लिए. दल्ले ने अखिला का सर पकड़ के उसके हलक तक अपना लंड ठूंस दिया. अखिला की आँखों से आंसूं से आ गए. मैंने धक्के धीरे किये तो शिल्पा बोली- कोई बात नहीं, ये नोर्मल है. बोल के उसने अखिला की चुचियों पे अपने दांत गदा दिए. पहलवान ने भी धक्के जोर कर दिए. मेरे अन्दर का जानवर मजे ले रहे था और मैंने भी धक्के ज़ोरों से मारने शुरू कर दिए. दल्ला अपने लौड़े को अखिला के हलक तक पूरा घुसा देता, फिर पूरा निकाल लेता, साथ में लार सी निकल आती. शिल्पा हटी, उसने अपना पुर्से खोला और कपडे टांगने वाले कलिप निकाल लाई. मैंने सोचा, इसका क्या काम. मेरे देखते देखते शिल्पा ने एक एक क्लिप अखिला के निप्पलों पे लगा दी, अखिला इधर हमारे झटकों से जूझ रही थी, उधर दल्ले के लौड़े से मुंह बंद था और अब ये यातना. कसम से बहुत मजा आ रहा था. शिल्पा ने क्लिप्स ले के अखिला के नाक पे, पेट पे, कांच में, और जितनी नर्म जगह नज़र आयी, वहाँ लगा दिए. अखिला पसीने पसीने हुई जा रही थी, पूरा शरीर गौरे की बजाय एकदम लाल और जहां जहां क्लिप्स लगाई थी, वहाँ वहाँ से एकदम सुर्ख लाल. फिर शिल्पा कभी क्लिप्स को खींचती, कभी हिलाती, एकदम मजे ले रही थी. हम इधर ज़ोरों से धक्के देते रहे. थोड़ी देर बाद मैं थक गया तो मैंने कहा, अबी अकेले मैं चौदूंगा. दोनों मान गए और मैंने अखिला को साइड पे लिटाया, गांड में लंड घुसाया, हाथों से उसके शरीर पे कभी चूंटी मारी कभी उसके कूल्हों के बीचे में रख उसकी गांड खोलने की कोशिश की, कभी क्लिप्स खींची. मुझे ये बताते हुए शर्म आती अगर अखिला ने बाद में कहा न होता के उसे भी मजा आया था. खैर, जम के चुदने के बाद जब मेरा वीर्य निकला, मैंने अपना काण्डम उतारा और सारा माल अखिला के मुंह पे निकाल दिया. उसकी गर्दन कास के पकड़ी के वो थूक न पाए, और वो गतागत पी गयी. उसकी आँखों में थोड़ी नमी सी थी, शायद वीर्य के स्वाद से, शायद योन-यातना से. मैं एकदम मर सा गया, इतनी थकान हो गयी थी. मैं लेता और खर्राटे लेने लगा. थोड़ी देर में आँख खुली, दल्ला और पहलवान दोनों अखिला की आगे और पीछे से ले रहे थे. एकदम जानवरों की तरह, कभी अपने नाखून, कभी दांतों और कभी क्लिप्स से जगह जगह यातना देने से नहीं चूक रहे थे. मेरा लंड फिर खड़ा हो गया. अब अखिला के मुंह में देने का मेरा नंबर था.

उस रात बहुत चुदाई हुई, दोनों लड़कियों की. शिल्पा भी न बच पायी, उसका भी नंबर आया. उसकी गांड में तो पहलवान और दल्ले दोनों ने एक साथ लंड डाले. उनके घर की बात, मैं कौन होता हूँ.

अगले दिन सुबह जब अखिला की आँख खुली तो मैं एकदम तैयार था. मैंने उससे पूछा के कैसा लग रहा है, वो बोली के बहुत मजा आया पार्टी में. फिर करेंगे दुबारा. उसके शरीर पे रात भर के नोचने के निशाँ साफ़ नज़र आ रहे थे. मैं मुस्करा दिया. मुझे एक खटका हुआ लेकिन, के कहीं दल्ले और पहलवान ने उसे कोई दवाई तो नहीं पिलाई थी के उसे कुछ याद न रहे. मैंने सुना तो है के ऐसा कुछ होता है, लेकिन उसका इस्तेमाल गैर कानूनी भी है और मेरे उसूलों के खिलाफ भी. मैंने ज्यादा उस रात के बारे में कभी अखिला से बात न की, लेकिन जो मज़ा उस रात आया, बहुत कम बार आया है. और ऐसे मौकों में ज्यादातर पहलवान भी मेरे साथ था.

अगले अंक में मैं आपको बताऊंगा के अखिला ने कैसे मेरी मदद की दिया को चुदाने में.

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ऑफिस की लड़कियों की चुदाई

February 22, 2011 Leave a comment

अब भाई लोगों, जैसा मैंने आपसे पहले बोला था, मेरी सोच वक़्त में थोड़ी आगे पीछे जाती रहेगी. आप लोग सोच रहे होंगे, ऐसा क्या चौदु आदमी है जो इतनी लडकियां छोड़ बैठा है, तो मैं सिर्फ ये कहूँगा के अगर सिर्फ लडकियां चोदने की बात रहती तो ठीक है लेकिन ज़िंदगी में और भी काफी चीज़ें हैं, जो आपके पास हैं लेकिन मेरे पास नहीं. मेरी ज़िन्दगी सिर्फ चोद का प्रकरण बन कर रह गयी है. लेकिन उम्मीद है के इससे आपका मनोरंजन हो रहा होगा. कई बार कहानियां लिखते लिखते खड़ा हो जाता है तो या तो मुठियाना पड़ता है या किसी पुरानी महबूबा या रंडी के ठिकाने पे पहुँच जाता हूँ. खैर, सफाइयां बाद में, पहले आपको अपनी अगली कहानी सुनाता हूँ.

ये कहानी उन दिनों की है जब मैं ऑफिस में नया नया मेनेजर बना था. छोटी कंपनी थी, तो काफी ज़िम्मेदारी थी. अपने डिपार्टमेंट में लोगों को मैं ही भर्ती करता था. मुझे जानते हो समझ ही गए होंगे के मैंने माल लडकियां ठूंस ठूंस के भर राखी होंगी. खैर, केवल दौ लडकियां थी. लेकिन माल थी दोनों- एक मेरी सेक्रेटरी – दिल्ली की एकदम तेज़ और कॉलेज से ताजा निकली हुई लडकी और दूसरी चंडीगढ़ से- मेरे डिपार्टमेंट में इंटरप्रेटर का काम करती थी – यानी के जापानी से इंग्लिश और इंग्लिश से जापानी में ट्रांसलेट करती थी. दिल्ली वाली का नाम दिया शर्मा और चंडीगढ़ वाली का नाम अखिला बत्रा. दोनों बहुत ही सुन्दर, गौरी चिट्टी. दिया थोड़े पतले फ्रेम की- साढ़े पांच फूट लम्बी, एकदम मस्त फिगर – गौल गौल गांड, तीखे फीचर, एकदम पतली कमर, लेकिन मम्मे छोटे छोटे. ऊपर से शक्ल ऐसी के एकदम ताजा और नाजाकत से भरी. जब भी वो अपनी टाईट जीन पहन के आती थी, मैं उसको बार बार ऑफिस में बुलाता रहता था और जब वो उठ के जाती थी तो उसकी मचलती गांड को घूरता रहता था. अब ऐसी बातें छिपती नहीं हैं. उसने भी जाते जाते ऑफिस के दरवाजे में मुड़ के खड़े होके बातें करनी शुरू कर दी. अब हर बार यही होता – मैं उसे ऑफिस में बुलाता, थोड़ी देर बात होती, फिर जाते जाते वो दरवाजे में खड़ी हो जाती, मेरी और गांड करके और टाँगे क्रॉस कर लेती ताकि गांड पे और ज्यादा ध्यान जाए. बार बार मेरी नज़रें उसके मुस्कुराते चेहरे से फिसल फिसल के उसकी गांड पे आ गिरती. उसके जाने के बाद मैं देर तक लंड सहलाता रहता.

अखिला भी कोई कम माल नहीं थी, दिया से कोई ३-४ इंच लम्बी और भरे भरे मम्मे, मस्त गौल गुन्दाज गांड और बीच में लम्बी, पतली कमर, भरे भरे होंठ ऐसे के बस बैठ के या तो चूसते रहो या लंड मुंह में देके चुसाते रहो. जापानी कंपनी के साथ काम करके थोड़ी थोड़ी जापानी मुझे भी आती थी लेकिन मैं जब भी मौका मिलता था, बहाने से अखिला को बुला के कोई कांट्रेक्ट या ड्राइंग खोल के ट्रांसलेट करने बुला लेता था. वो अपनी कुर्सी एकदम मेरे साथ लगा के मेरे साथ बैठ जाती थी और मैं लंड खड़ा होने के कारण १० मिनट तक उठने लायक नहीं रहता था. उसका मुंह मेरे मुंह के इतने नजदीक होता था के बस ज़रा सा झुकूं तो किस्स हो जाए, लेकिन ऑफिस है सो सावधान रहना पड़ता था. ऊपर से उसकी मंगनी अभी हुई थी तो सोचा के ज्यादा चांस नहीं है. खैर मेरे जैसे तजुर्बेकार को पता होना चाहिए के ये सब चुदाई के रास्ते में नहीं आता. मेरे ऑफिस में और भी लोग थे, लेकिन मैं ही अकेला मेनेजर था और मेरे ही पास ओपेल एस्ट्रा कार थी, सो टौर मेरे ही थे. मैं लगातार दोनों को लाइन डालता रहता के कोई तो फंसे नहीं तो ऐसे ही देख देख के मजे लेते रहने में भी कोई हर्ज नहीं था मुझे. थी दोनों सहेलियां लेकिन मैं अनजाने में उनके बीच आ गया जिसका नतीजा आप थोड़ी देर में जान ही जायेंगे – कुछ अच्छा कुछ बुरा. शुरू ये कुछ इस तरह हुआ के मैं अखिला के साथ बैठा कुछ पेपर ट्रांसलेट कर रहा था के दिया आ गयी. जाते जाते उसने थोडा फ्लर्ट मारा-”बॉस कभी घुमाओ वुमाओ यार” तो मैंने कहा – “कोई नहीं शाम को क्लब चलते हैं.” दिया ने दरवाजे में अपने उसी अंदाज में खड़े होके मेरी और मुस्कान दी, अंगडाई सी दी और मेरी नज़र उसकी गांड पे जा पहुँची, बोली – “हाँ हाँ, जैसे ले जाओगे”. “अब की बार सच्ची ले जाऊंगा, मैं बुला.” मेरे कंधे पे हल्का सा एक नर्म और गर्म स्पर्श हुआ और अखिला बोली – “मुझे भी ले चलोगे?” था तो हल्का सा मजाक, लेकिन मेरी और झुकते हुए अखिला का मम्मा मेरे कंधे से रगड़ा गया था. मैं थोडा चौंक गया, अखिला संभली लेकिन दिया को नज़र आ गया. बोली – “हाँ, बॉस, दोनों को ले चलो”, फिर जाते जाते उसने आँख मारी और निकल गयी.
मुझे उसके बाद ज्यादा समझ में आया नहीं क्या करूं, श्याम को घर जाके मुठ्ठी मारी दोनों के नाम की तब जी को चैन पड़ा. फिर मैंने एक प्लान बनाया और उस प्लान के तहत काम करना शुरू कर दिया. अब तक मुझे एकदम साफ़ नज़र आ गया था के दोनों लडकियां चुदने पे आमादा हैं, लेकिन ऑफिस से बाहर मिलें तो कैसे. और वैसे भी पहले धीरे धीरे शुरुआत करने से गलतफहमी होने की सम्भावना कम रहेगी. अब मैं पूरा पलान बना के अगले दिन एकदम तैयार ऑफिस पहुँच गया. अखिला को अपने कमरे में बुला के पहले इधर उधर की बातें की, साथ में हिंट देता रहा पूछा के क्या किया कल रात, शनिवार को क्या कर रही है, वगैरा. एक बार भी उसने अपने मंगेतर का नाम लेके मूड खराब नहीं किया. फिर मैंने अपनी ड्राइंग्स खोली, और उसे अपने पास बैठाया. इस बार मैंने अपने कुर्सी उसकी कुर्सी के नजदीक खिसका ली. ड्राविंग बीच में रख के मैं थोडा और झुक कर अखिला के चेहरे के नजदीक अपना चेहरा ले आया. वो भी थोड़ी और नजदीक आ गयी. मैंने अपनी कोहनी उसकी और झुका दी तो उसने भी सट से अपना चूचा मेरे बाजू से लगा दिया. मैं थोड़ी देर ऐसे ही काम की नौटंकी करते हुए अपने बाजू से उसका मम्मा सहलाता रहा. उसका मम्मा पकड़ने की हिम्मत न हुई के कहीं कोई आ ना जाए. इतना सोचते ही दरवाजे पे किसी ने दस्तक दी, दिया थी. अन्दर आ के उसे माजरा समझ में आ गया.
मेरे बाजू से अखिला का मम्मा रगड़ते देख के वो थोड़ी झिझकी, लेकिन मैंने उसे अन्दर बुला लिया. “यार, मेरे बॉम्बे वाला इंस्पेशन कब है?”, मैंने पूछा तो बोली – “अगले हफ्ते, जाओगे क्या?”. मैंने बहाना बनाया – “हाँ, देख के लग रहा है जाना पड़ेगा, शायद अखिला को भी जाना पड़े, ट्रांसलेट करने के लिए.” अखिला के मम्मों का हिलना मुझे अपने बाजूवों पर महसूस हुआ. “चलोगी, अखिला?” मैंने पूछा. वो बोल पाती या बहाना बना पाती, उससे पहले मैंने कहा – “मेरी गर्लफ्रेंड भी आजकल बॉम्बे में है, तुम मिल भी लेना.” “ओह कूल, ज़रूर, बॉस.”, अखिला बोली.  “आपकी गर्ल फ्रेंड?”, दिया ने पूछा और अपने दोनों हाथ मेरे टेबल पे रख के मेरी और झुक गयी. उसकी बाहों के बीच में दब के मम्मे बीच में इकठ्ठे हो गए थे. वो थोड़ी और नीचे झुकी और मैं उसके शर्ट के ऊपर से झाँक पाया उसके मम्मे – एकदम दूधिया, चिकने और चमकदार, और इतने छोटे भी नहीं थे जितने मैं समझ रहा था. मैंने कहा – “हाँ, शिल्पा नाम है. तुमसे भी मिलवाऊंगा कभी.” खैर, ज्यादा कुछ नहीं उस दिन, बस अगले हफ्ते तक रोज़ अखिला के मम्मे अपने कन्धों से रगड़ते रहा. 

बॉम्बे का सिर्फ दौ दिन का टूर था, मतलब सिर्फ एक रात. अब मेरे पास मौका बहुत कम था- एक रात में अखिला की चुदाई कर पाऊँ तो कर पाऊँ, वापिस आ के दिया की नज़रों से छिप के चोदना मुश्किल है. आप सोच रहे होंगे मेरी बॉम्बे में गर्लफ्रेंड के बारे में – वास्तव में वो मेरी गर्ल फ्रेंड नहीं एक कॉल गर्ल है, जो मॉडल भी है. ये उन दिनों बॉम्बे में बहुत चल रहा था के काफी सारी मोड़ेल्स साथ साथ कॉल गर्ल का काम भी करती थी. नयी मॉडल के रेट- १०००० रुपये दौ घंटे के और २५००० पूरी रात के. टॉप मॉडल के २५००० दौ घंटे के और ५०००० से ले के एक लाख तक पूरी रात के. मेरी पहचान वाली मॉडल थी बीच की, लेकिन मैं उसका रेगुलर ग्राहक था तो कई बार पार्टीयों में भी साथ चले जाते थे. मैंने उसको फ़ोन करके बोला के एक रात हैं वहाँ, किसी तमीज वाली पार्टी में इन्वईट करो और एक लडकी साथ में है, जो इस टाइप पार्टी में कभी आयी नहीं है, उसकी चुदाई में मदद करवाए. शिल्पा सब समझ गयी और इस प्रकार अखिला की चुदाई की पूरी तैय्यारी हो गयी.

(to be contd….)

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रूचि और उसकी मस्त गांड – 3

February 21, 2011 Leave a comment

दोस्तों, गांड मारने के बारे में काफी पढ़ा था के तैय्यारी करनी पड़ती है, वगैरह. लेकिन यहाँ अगर तैय्यारी की सोचता तो शायद रूचि की गांड कभी न मिल पाती. मेरा दिमाग काफी तेजी से काम कर रहा था और मैंने उसके कपडे भी उतार फेंके. अब मैं नंगा, मेरा तना हुआ लौडा, रूचि नंगी, उसके मम्मों पे मेरे कसते हाथ, उसकी फुदकती चूत और कोमल, प्यारी, राजदुलारी गांड. मैं अपने हाथों से उसके मम्मे और भी ज़ोरों से रगड़ने लगा, रूचि ने मेरे हाथ अपने मम्मों से हटाने के कुछ क्षीण प्रयास किये लेकिन इतने सालों के बाद हाथ में आने के बाद इतनी आसानी से थोड़े न छोड़ता. खूब मम्मे दबा के और निप्प्ल चूस चूस के मेरे हाथ नीचे खिसके और एक हाथ लगा चूत को सहलाने तो दूसरा उसकी गांड से खिलवाड़ करने लगा. बाजू में डाबर आवला केश तेल पड़ा था, मैंने थोडा सा उंगली पे डाला और उंगली घुसेड दी उसकी गांड में. रूचि काफी आश्चर्यचकित हो उठी. “क्या कर रहे हो?”, बोली. तो मैंने कहा, कुछ नहीं, मजे ले रहा हूँ. मैं एक ऊँगली उसकी गांड में और दूसरी उसकी चूत में अंदर बाहर करने लगा. रूचि मेरे लौड़े को अपने हाथों से सहला सहला के मानो सांत्वना सी दे रही हो. अब लौडा इतना सख्त हो गया था के फुन्फ्कारें मारने लगा और मैंने आव देखा न ताव, चूत से लंड लगाया और हौले हौले से घुसना शुरू किया. इतनी टाईट चूत के लंड महाराज के मुंह से सिसकारी निकल पडी. मैंने रूचि को घूर के देखा, क्या हुआ, मेरा दोस्त नहीं लेता तेरी जो इतनी टाईट है? वो बोली, के नहीं – शादी से पहले नहीं करना चाहता. मुझे थोड़ी शर्म सी आयी और ठीक भी लगा के एक बिचारी लडकी के जीवन में थोड़ी ख़ुशी (और थोडा सा लंड) प्रदान कर पा रहा हूँ. लंड एकदम फँस के बैठ गया उसकी छूट में तो मैं थोडा थोडा अन्दर बाहर करने लगा. रूचि के चेहरे पे दर्द और आनंद के मिले जुले भाव थे. मैंने चुदैयी थोड़ी तेज कर दी और जोर से गांड यूँ दबोच ली के एक हाथ में एक कुल्हा और ज़ोरों से ऐसे दबाई के बीच में से एकदम चौड़ी हो जाए. मेरे धक्के तेज़ होते गए और छूट के गीलेपन के चलते ज़ोरदार “फच्च फच्च” की आवाज़ आने लगी. मैंने रूचि को उल्टा करवाया और कुतिया स्टाइल में उसकी चूत में लंड दे के ज़ोरों से झटके देने शुरू कर दिए. फिर उसके चूचे थाम के धक्कों का जोर और बढ़ा दिया. फिर मैं अपने हाथों से उसकी पतली, नाज़ुक और चीकनी कमर पर रेंगते हुए उसकी गांड तक ले आया. फिर मैंने थोडा और तेल उसकी गांड पे डाला और एक उंगली से गांड को थोडा टटोला, और इससे पहले के रूचि भांप पाती, मेरा लंड उसकी चूत से बाहर और सुपाडे तक उसकी गांड में. “बहुत दिनों से तेरी गांड पे नज़र थी, रूचि”, मैं बोला. रूचि ने कुछ बोलना चाहा लेकिन बोल न पायी. मैंने लौदा धीरे धीरे अन्दर करना शुरू किया और रूचि ने आंके बंद कर ली और हलके से सिसकारी ली. मैंने रूचि को उसकी साइड पे लिटाया, एक तांड अपने हाथों से ऊपर उठाई ताकि लंड गांड तक पहुँच सके, और अपना प्रयास ज़ारी रखा. थोड़ी देर में हलके हलके से धक्के लगा लगा के लैंड पूरा अन्दर घुस गया था. उस समय की भावना, दोस्तों, मैं किन्ही लब्जों में बयान नहीं कर सकता था. मेरा ताना हुआ सख्त मौत लौड़ा उसके एकदम टाईट गांड में और उसकी हर सांस के साथ मेरे लौड़े पे चरों और से उसकी गांड का कसाव. रूचि आँखें बंद करके लेती रही, मैंने अपनी दौ उंगलिया उसके मुंह में ड़ाल दी और दुसरे हाथ से उसके दोनों चूचों का मर्दन करता रहा. एक एक सेकंड इतना आनंददायी था के लग रहा था पूरे जीवन की साड़ी खुशियों के बराबर हो. फिर मैंने उसके मम्मे कास के दबाते हुए हलके हलके धक्के लगाने शुरू किये. रूचि ने सिस्कारियों के साथ साथ मेरे हाथों पे हलके से चबाना शुरू कर दिया. मैंने धक्के तेज कर दिए और जम के उसकी गांड को चौड़ा. बीच बीच में रुक जाता या लौड़ा निकाल लेता कहीं माल ना निकल जाए. लौड़ा बीच बीच में निकल के घुसाड़ने में ही पूरे पैसे वसूल हो जाते. ऐसे ही करते करते जब समय आया तो मैंने जोर से उसके चूचे दबाये और लंड को उसकी गांड में जितना  घुसता था घुसा के अपनी जांघ को उसकी गांड से एकदम जोर से सटा के पिचकारी मारी. तीन चार पिचकारियाँ कम से कम निकली होंगी. फिर मैंने लंड बाहर निकला, उसके मासूम कूल्हों से रगड़ के साफ़ किया और बिस्तर में उसके साथ पड़ा रहा.

“स्वाति के साथ भी यही किया क्या?”, रूचि ने पूछा. मैंने कहा – “नहीं, लेकिन अगर कर पाऊँ तो मज़ा आ जाए”. रूचि ने कहा – चलो, इकट्ठे ट्राई करते हैं. अब मुझे थोडा लगने लगा के इस घटना में दोनों का मिला जुला हाथ था.
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