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रूचि और उसकी मस्त गांड – 3


दोस्तों, गांड मारने के बारे में काफी पढ़ा था के तैय्यारी करनी पड़ती है, वगैरह. लेकिन यहाँ अगर तैय्यारी की सोचता तो शायद रूचि की गांड कभी न मिल पाती. मेरा दिमाग काफी तेजी से काम कर रहा था और मैंने उसके कपडे भी उतार फेंके. अब मैं नंगा, मेरा तना हुआ लौडा, रूचि नंगी, उसके मम्मों पे मेरे कसते हाथ, उसकी फुदकती चूत और कोमल, प्यारी, राजदुलारी गांड. मैं अपने हाथों से उसके मम्मे और भी ज़ोरों से रगड़ने लगा, रूचि ने मेरे हाथ अपने मम्मों से हटाने के कुछ क्षीण प्रयास किये लेकिन इतने सालों के बाद हाथ में आने के बाद इतनी आसानी से थोड़े न छोड़ता. खूब मम्मे दबा के और निप्प्ल चूस चूस के मेरे हाथ नीचे खिसके और एक हाथ लगा चूत को सहलाने तो दूसरा उसकी गांड से खिलवाड़ करने लगा. बाजू में डाबर आवला केश तेल पड़ा था, मैंने थोडा सा उंगली पे डाला और उंगली घुसेड दी उसकी गांड में. रूचि काफी आश्चर्यचकित हो उठी. “क्या कर रहे हो?”, बोली. तो मैंने कहा, कुछ नहीं, मजे ले रहा हूँ. मैं एक ऊँगली उसकी गांड में और दूसरी उसकी चूत में अंदर बाहर करने लगा. रूचि मेरे लौड़े को अपने हाथों से सहला सहला के मानो सांत्वना सी दे रही हो. अब लौडा इतना सख्त हो गया था के फुन्फ्कारें मारने लगा और मैंने आव देखा न ताव, चूत से लंड लगाया और हौले हौले से घुसना शुरू किया. इतनी टाईट चूत के लंड महाराज के मुंह से सिसकारी निकल पडी. मैंने रूचि को घूर के देखा, क्या हुआ, मेरा दोस्त नहीं लेता तेरी जो इतनी टाईट है? वो बोली, के नहीं – शादी से पहले नहीं करना चाहता. मुझे थोड़ी शर्म सी आयी और ठीक भी लगा के एक बिचारी लडकी के जीवन में थोड़ी ख़ुशी (और थोडा सा लंड) प्रदान कर पा रहा हूँ. लंड एकदम फँस के बैठ गया उसकी छूट में तो मैं थोडा थोडा अन्दर बाहर करने लगा. रूचि के चेहरे पे दर्द और आनंद के मिले जुले भाव थे. मैंने चुदैयी थोड़ी तेज कर दी और जोर से गांड यूँ दबोच ली के एक हाथ में एक कुल्हा और ज़ोरों से ऐसे दबाई के बीच में से एकदम चौड़ी हो जाए. मेरे धक्के तेज़ होते गए और छूट के गीलेपन के चलते ज़ोरदार “फच्च फच्च” की आवाज़ आने लगी. मैंने रूचि को उल्टा करवाया और कुतिया स्टाइल में उसकी चूत में लंड दे के ज़ोरों से झटके देने शुरू कर दिए. फिर उसके चूचे थाम के धक्कों का जोर और बढ़ा दिया. फिर मैं अपने हाथों से उसकी पतली, नाज़ुक और चीकनी कमर पर रेंगते हुए उसकी गांड तक ले आया. फिर मैंने थोडा और तेल उसकी गांड पे डाला और एक उंगली से गांड को थोडा टटोला, और इससे पहले के रूचि भांप पाती, मेरा लंड उसकी चूत से बाहर और सुपाडे तक उसकी गांड में. “बहुत दिनों से तेरी गांड पे नज़र थी, रूचि”, मैं बोला. रूचि ने कुछ बोलना चाहा लेकिन बोल न पायी. मैंने लौदा धीरे धीरे अन्दर करना शुरू किया और रूचि ने आंके बंद कर ली और हलके से सिसकारी ली. मैंने रूचि को उसकी साइड पे लिटाया, एक तांड अपने हाथों से ऊपर उठाई ताकि लंड गांड तक पहुँच सके, और अपना प्रयास ज़ारी रखा. थोड़ी देर में हलके हलके से धक्के लगा लगा के लैंड पूरा अन्दर घुस गया था. उस समय की भावना, दोस्तों, मैं किन्ही लब्जों में बयान नहीं कर सकता था. मेरा ताना हुआ सख्त मौत लौड़ा उसके एकदम टाईट गांड में और उसकी हर सांस के साथ मेरे लौड़े पे चरों और से उसकी गांड का कसाव. रूचि आँखें बंद करके लेती रही, मैंने अपनी दौ उंगलिया उसके मुंह में ड़ाल दी और दुसरे हाथ से उसके दोनों चूचों का मर्दन करता रहा. एक एक सेकंड इतना आनंददायी था के लग रहा था पूरे जीवन की साड़ी खुशियों के बराबर हो. फिर मैंने उसके मम्मे कास के दबाते हुए हलके हलके धक्के लगाने शुरू किये. रूचि ने सिस्कारियों के साथ साथ मेरे हाथों पे हलके से चबाना शुरू कर दिया. मैंने धक्के तेज कर दिए और जम के उसकी गांड को चौड़ा. बीच बीच में रुक जाता या लौड़ा निकाल लेता कहीं माल ना निकल जाए. लौड़ा बीच बीच में निकल के घुसाड़ने में ही पूरे पैसे वसूल हो जाते. ऐसे ही करते करते जब समय आया तो मैंने जोर से उसके चूचे दबाये और लंड को उसकी गांड में जितना  घुसता था घुसा के अपनी जांघ को उसकी गांड से एकदम जोर से सटा के पिचकारी मारी. तीन चार पिचकारियाँ कम से कम निकली होंगी. फिर मैंने लंड बाहर निकला, उसके मासूम कूल्हों से रगड़ के साफ़ किया और बिस्तर में उसके साथ पड़ा रहा.

“स्वाति के साथ भी यही किया क्या?”, रूचि ने पूछा. मैंने कहा – “नहीं, लेकिन अगर कर पाऊँ तो मज़ा आ जाए”. रूचि ने कहा – चलो, इकट्ठे ट्राई करते हैं. अब मुझे थोडा लगने लगा के इस घटना में दोनों का मिला जुला हाथ था.
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