Home > Hindi, Story > वियत्नामी लडकी की दास्ताँ

वियत्नामी लडकी की दास्ताँ


मेरी दौ-चार कहानियाँ सुनके आप को लगता होगा के मैं ने जिसे चाहा, चौद डाला. ऐसी बात नहीं है. पिछली बार मेरी कहानी कुछ ज्यादा ही गर्म हो गयी थी, तो इस बार मैं थोडा खड़े लंड पे धोखा करने वाला हूँ, पूरा नहीं, लेकिन काफी.

ये कहानी उन दिनों की है जब मैं अमेरिका में एक प्रोजेक्ट पे गया हुआ था. मैंने कहानियां बहुत सुनी थी के मस्साज पार्लर के नाम पे रंडी गिरी चलती है. काफी रिसर्च के बाद समझ में आया के बहुत रिस्की मामला है, दूर रहो. ये भी पता चला के ज्यादातर बुजुर्ग चीनी या कोरियन महिलाएं काम करती हैं ऐसी जगहों पे. अपुन को कमसिन लड़कियां – १९-२० से २८-३० साल तक की रेंज में पसंद आती हैं. लेकिन एक दिन खाने के बाद वापिस होटल आते हुए एक सलून के खिड़की से नज़र पडी एक बहुत ही सुन्दर २२-२३ साल की चीनी टाइप लडकी काउंटर पे बैठी थी बाद में उसने खुद ही बताया था के उसके माँ-बाप वियत नाम के हैं. दूकान सामने से पूरी शीशे की थी तो अन्दर सब साफ़ दिख रहा था. सामने ३-४ हेयर-ड्रेससिंग वाली कुर्सियां थी, एक तरफ काउन्टर. सो, सामने से कुछ ऐसा नहीं के गलत काम हो रहा हो. मैंने सोचा बाल कटा लेते हैं लौंडिया से, अपने हिंदुस्तान में कहाँ ऐसी माल लडकियां बाल काटती हैं. फिर मेरी नज़र सामने वाले साइन पे पडी – दूकान का नाम था – “फुल सर्विस सलोन”. नीचे एक जगह लिखा था – एक घंटे का म्स्साज ४० डालर. मैं थोडा तेज़ तेज़ चल रहा था और मुझे कुछ काम भी था, इसलिए मैं अन्दर नहीं गया. ऊपर से जगह भी ऐसी नहीं लगी के वहाँ रंडी गिरी होती हो. अधिकतर ऐसी जगहों का सामने से शीशा काला होता है. मैं होटल गया, इंटर नेट पे ढूँढा जगह के बारे में, तो ज्यादा कुछ मिला नहीं. मैंने सोचा अगले दिन ट्राई मारता हूँ – और कुछ नहीं तो एक दम माल लडकी से पूरे शरीर की मालिश ही करवा लूँगा.

सो अगले दिन मैं उसकी दूकान में पहुँच गया. वही लडकी. आज भी याद है के उसने एक मैरून रंग की शर्ट और जींस स्कर्ट पहन राखी थी. कोई और ग्राहक था नहीं, सो मैंने उस से कहा के म्स्साज करवाना है. बाकी बातें अंग्रेजी में हुई लेकिन मैं आप लोगों के लिए हिंदी में लिखूंगा. उसने पूछा – कहाँ से पता चला, क्रेग लिस्ट se? मैंने झूठ बोला – हाँ. फिर ठीक है – १० डालर की छूट. मैंने सोचा, तेरे मम्मे मसलने के तो १०० डालर भी दे दूं, जालिम. खैर, बहुत ही माल लडकी, बालों में थोडा “ब्लोंड” हाई लाइट कर रखा था, कद कुछ ५-४ टाइप. एकदम चीकनी. उसने अपना नाम बताया – लिली. उसकी आवाज़ इतनी मीठी जैसे शहद टपक रहा हो. मैं एकदम सेंटी हो गया. मैं तो तैयार था खाली म्स्साज करवा के होटल जाने को और मुठीयाने को, लेकिन जब उसने सलून का मुख्य दरवाजा बंद करके पर्दा लगा दिया, तो मेरी कुछ उम्मीद बढ़ी.

वो मुझे पीछे एक कमरे में ले गयी, जहां एक म्स्साज टेबल था, बोली के कपडे उतार के मुंह नीचे करके लेट जाओ. बोल के वो बाहर चली गयी और दरवाजा पीछे से बंद. मैंने सोचा चड्ढी उतारूं के नहीं. फिर सोचा, उतार के देखता हूँ क्या बोलती है, ज्यादा से ज्यादा पहनने को बोलेगी. उस समय मुझे नहीं मालूम था के लोग ज्यादातर एकदम नंगे ही म्स्साज करवाते हैं.  मैं चड्ढी उतार के मुंह नीचे करके लेट गया. एक छोटा सा तौलिया अपने चूतड पे डाल लिया, क्यूंकि टेबल पे पड़ा था. खैर, थोड़ी देर बाद दरवाजे पे दस्तक दे के लिली कमरे में आयी. पूछा हल्का के भारी म्स्साज, मैंने कहा भारी, सोचा के इतनी पतली और नाजुक सी लडकी क्या भारी कर पायेगी. कितना गलत था मैं! खैर, मेरे हाथों से उसका बीच बीच में हल्का हल्का स्पर्श बन जाए सोच के मैंने अपने हाथ टेबल के दोनों और डाल दिए, ताकि वो इधर उधर चले तो इस मुद्रा में आये के यहाँ खादी हो तो उसकी टांगों से थोडा स्पर्श होगा. मैं पूरा खिलाड़ी हूँ, पूरा काम भी करता हूँ और ऐसी छोटी छोटी खुशियों को भी हाथ से जाने नहीं देता.

तो दोस्तों, लिली ने मेरी कमर का मस्साज शुरू कर दिया, पहले दायीं और आयी और मेरे हाथों की पोजीशन एकदम उसकी टांगों के बीचों में. मेरे हाथ हलके हलके से उसकी टांगों के बीच में लटकते रहे और वो जोर लगा लगा के मेरी हड्डीयां तौडती रही. एक बार मैंने अपने हाथ को ज़रा सा घुमा के उसकी पिंडलियों को हल्का हल्का सा छूना शुरू कर दिया. थोड़ी देर बाद वो दूसरी तरफ आयी, वही कहानी. मेरा लंड मेरे नीचे दबा अब उठने लगा. अब मुझे लौड़े को ठीक करना पड़ेगा सोच के थोड़ी शर्म सी आयी. खैर, वो मेरी कमर की मालिश करके मेरी टांगों की और गयी तो मैंने अपने कुल्हे उठा के अपना हाथ डाल के लंड अडजस्ट कर लिया. सोचा के अब ये हाथ नहीं लगने देगी, इसको समझ में आ गया होगा के हरामी आदमी आया हुआ है. लेकिन ऐसा कुछ न हुआ. उसने मेरी टांगों की मालिश करते करते अपना हाथ मेरी जाँघों तक लाना शुरू कर दिया. एक दौ बार तो इतना ऊपर और इतना अन्दर के मेरे नीचे मुड़े हुए लौड़े से मुलाक़ात हो गयी. उसने मेरे कूल्हों से तौलिया हटाया और जम के पीछे से मालिश की. आनंद आ गया! फिर मेरी अँगुलियों की मालिश करते हुए जब उसने बल निकलने शुरू किये तो पूरे अपने मम्मों तक ले जाती. उसके शरीर की गर्मी से मेरे लौड़े में आग सी लगी हुई थी.
अब उसने मुझे पलटने को बोला और मैं पलट गया. मेरा लौदा एकदम तन के उठ गया. लिली हंसी और मुझे झेंप सी आ गयी. उसके बाद वो मेरे सर के पीछे खडी होके मेरी छाती की मालिश करने लगी तो उसके मम्मे मेरे मुंह के नजदीक आ जाते. अब मेरी झिझक थोड़ी दूर हुई तो मैंने उसके मम्मों को देखना शुरू कर दिया और लौड़ा ज़ोरों से अंगडाई लेने लगा. उसने मेरे लंड की तरफ इशारा किया, फिर अपने हाथों से मुठ लगाने वाला पोज बनाया और पूछा – करना है क्या? मुझे अपनी किस्मत पे यकीन नहीं हुआ. मैंने कहा हाँ हाँ, वो भी मस्साज में है क्या? उसने कहा- टिप देनी पड़ेगी. मैंने कहा- ठीक है. मैंने पूछा – मैं तुम्हे छू सकता हूँ. तो वो बोली- थोडा थोडा ठीक है. बस, फिर क्या था, मैं बिस्तर पे पड़े पड़े कभी उसकी गांड दबा रहा हूँ कभी उसके मम्मे और वो मेरी मालिश में लगी है. फिर आखिर मेरे लौड़े को उसने हाथ से पकड़ लिया. मैंने कहा- मुंह में ले लो. वो बोली- नहीं मैं वो सब नहीं करती. मैंने कहा, ठीक है, कम से कम अपनी चूची तो दिखा – १०० डालर दूंगा. उसकी आँखों में चमक सी आ गयी. बोली – १०० डालर मम्मे दिखाने के. मैंने कहा – हाँ.
उसने अपनी शर्ट खोली और इतने सुन्दर और कसे हुए चूचे मैंने पहले कभी नहीं देखे थे. वो पतली थी लेकिन मम्मे उसके साइज़ के हिसाब से एकदम सही. और पकडे तो बाप रे – इतने कसे हुए. वो मुझे मुठिया रही थी और मैं उसके चूचे ज़ोरों से दबा रहा था. वो बोली- इतने जोर से नहीं. लेकिन मैं न माना. फिर मैंने उसके पेट पे हाथ फिरना शुरू कर दिया. उसने पीयर्स करवा रखा था, इतना  टाईट पेट और ऊपर से पीयर्सिंग , लौड़ा एकदम काबू में नहीं आ रहा था. मैं जोर जोर से उसके मम्मे दबाता, कभी उसकी स्कर्ट में हाथ डाल डाल के उसकी गांड दबाता तो कभी चूत पे उंगली फेरता. फिर मैंने उसको अपनी और खींचा और चूचे को मुंह में लेने की कोशिश की, लेकिन उसने मना कर दिया. मैंने भी एक न सूनी और जोर से उसे अपनी और खींच के उसके चूचे पे मुंह लगा दिया. दुसरे हाथ से उसका दूसरा चूचा जम के दबाया और अपने उलटे हाथ को उसकी स्कर्ट में दे के पीछे से जोर से गांड दबानी ज़ारी राखी. उसने भी मुठियाना तेज कर दिया. मैंने फिर पूछा के लौड़ा चूसेगी, उसने फिर मना कर दिया. मेरा माल निकलने वाला था के मैंने उसकी चूची को बेहद जोर से भींचा. वो चिल्ला सी उठी और मेरा माल निकल के उसके हाथों पे चिपक गया. वो थोड़ी देर हलके हलके से मेरा माल बाहर निकालती रही और मैं आँखें बंद करके उसके कूल्हे और मम्मे को जोर से भींचता रहा. फिर वो बोली – एक मिनट में आती हूँ. मैं लेटा रहा और वो एक गरम तौलिया लेके आयी. फिर उसने गरम तौलिये से मेरा लंड साफ़ किया. फिर वो एक और गरम तौलिया ले के आयी और उसने मेरे सारे शरीर से तेल साफ़ किया. मैं बहुत खुश खुश बाहर निकला. उसने अपना कार्ड दिया के कभी दुबारा आना हो. मैंने सोचा पास में ही रहता हूँ, फिर आ ही जाऊंगा और कार्ड फ़ेंक दिया. उस के बाद मैं कुछ दिनों तक उसका चक्कर लगा नहीं पाया. जब चक्कर लगा तो देखा के सलून बंद है और किराए के लिए खाली है. मैंने अपना सर पीट लिया. वो एक लडकी थी, जो चुद सकती थी लेकिन मैं चौद न पाया.
Categories: Hindi, Story
  1. No comments yet.
  1. No trackbacks yet.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: