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ऑफिस की लडकीयों की चुदाई – 3 : दिया के मुंह में दिया


बॉम्बे से आने के बाद चुदाई का माहौल थोडा मस्त हो गया था. उस शनिवार रात को फिर अखिला के साथ घूमने का प्लान बना, जिसका अंत भरपूर चुदाई में हुआ. उसके मोटे मोटे मस्त मम्मों पे लंड रगड़ने की याद से लौड़ा हर बार सख्त हो जाता है. लेकिन असली मजा अगले हफ्ते काम पे शुरू हुआ. मैंने सुबह सुबह हमेशा की तरह अखिला को अपने कमरे में बुलाया और कुछ जापानी कागज़ खोल के बैठ गया. दोनों ड्राईंग देखने के बहाने आस पास बैठे रहे. सामने डेस्क पे कंप्यूटर और उसके पीछे मैं और अखिला आस पास कुर्सियों पे बैठे बैठे एकदम नजदीक आ गए. थोड़ी देर में मेरा हाथ उसकी टांग पर जा पहुंचा, उसने अपनी टाँगे थोड़ी खोली फिर उसका हाथ भी मेरे जांघ पे आ टिका. मैंने उसका हाथ पकड़ा के अपने खड़े लौड़े के ऊपर ला रखा. अखिला ऊपर ही ऊपर से हलके हलके मेरे लंड को पुचकारने लगी. लंड और सख्त होता गया. मैंने उसकी टांगों के बीच में अपना हाथ और अन्दर पहुंचा दिया, लेकिन अब तक चूत तक न पहुँच पाया था के दरवाज़ा खुला और दिया अन्दर आ गयी. हालाँकि वो मेरे डेस्क के सामने से ये सब नहीं देख सकती थी, लेकिन अचानक उसके आने से मैं चौंका और मैंने अपना हाथ अखिला की रानों से हटा लिया. लेकिन अखिला में मेरे लौड़े से छेडछाड चालू रखी. दिया थोड़ी इधर उधर की बात करने लगी, फिर मेरे डेस्क के झुक के बातें करने लगी – पूछा के पिछले हफ्ते की ट्रिप कैसी रही, वगैरह. उस दिन उसने कुछ ज्यादा ही लो-कट टी-शर्ट पहन रखी थी. उसकी ब्रा का तो पता नहीं चला लेकिन जब वो मेरे सामने झुकी तो उसके मम्मों के भीतर तक सब नज़र आने लगा. मेरी नज़रें उसके मम्मों की दुधिया त्वचा से फिसलती उसके मम्मों के बीच में आ टिकी. उसने झुके झुके अपने एक बाजू को अपने मम्मों के नीचे से यूँ लपेटा के मम्मे और उभर के बाहर आने लगे. इधर अखिला मेरी और कनखियों के देख के मुस्कराने लगी और उसने मुठियाना जारी रखा. मुझसे और झेला न जा रहा था और थोड़ी देर में मेरे मुंह से शब्द निकलने बंद हो गए. दिया ने पूछा- सब ठीक तो है, बॉस. मैंने कहा- हाँ, थोड़ी देर में आओ, लेकिन उसने गुफ्तगू चालू रखी. अब मेरा दिल कर रहा था के टेबल के उपर से लपक के उसकी चूचियों से चिमट जाऊं, लेकिन हिम्मत न हुई. ऐसा बहुत बार हुआ है के मैं लड़कियों की फ्लिर्टिंग का गलत मतलब ले बैठा और बेकार में चांटा खा बैठा. वैसे भी, काम पे ये सब. सो लौड़े के उफान पे शान्ति तब आयी जब मेरा वीर्य आखिर बाहर निकला. अखिला ने हलके हलके सहलाना जारी रखा. मैं बड़ी मुश्किल से हांफने पे काबू रख पा रहा था. मैंने ऊपर देख के आँखें बंद कर ली. हिम्मत नहीं हुई के आँखें खोलूँ लेकिन जब खोली तो दिया सामने मुस्करा रही थी और अखिला अभी भी मेरे भीगे लौड़े को सहला रही थी.

आँखें खोली तो देखा दिया मेरे बाजू में खड़ी थी. और अखिला अभी भी मेरा लंड सहला रही थी. दिया बोली – “बॉस, मैं भी कुछ मदद करूँ?” मैं थोडा हकलाया सा, लेकिन मेरा अश्लील दिमाग तुरंत समझ गया के इनकी मिली-भगत है. मैं अखिला की तरफ देख के मुस्कराया. मुझे अपनी किस्मत पे भरोसा नहीं हो रहा था. अब अखिला अपनी सीट से खड़ी हो गयी और दिया से बोली- “लो अब तुम्ही संभालो, अगर कुछ बचा हो”, कहके हंसी. मेरा लंड हलके हलके से फिर सख्त होना शुरू होने लगा. अब दिया मेरे बाजू में बैठी और अखिला मेरे पीछे खड़ी हो गयी. ऑफिस में चुदाई का तो माहौल बिलकुल नहीं हो पाता, लेकिन लड़कियों से टेबल के पीछे पीछे मुठीयाने से अगर कोई गलती से कमरे में आ भी जाता तो देख नहीं पाता. अब अखिला मेरे पीछे एकदम मेरे कंधे के साथ मम्मे लगा के खड़ी हो गयी. दिया मेरे साथ बैठ के मेरा लंड ऊपर ऊपर से सहलाने लगी. लंड अभी भी एकदम नर्म था. मैंने आव देखा न ताव कस के उसकी चूचियां दबोच ली. एकदम नर्म नर्म कोमल कोमल चूचियों को छू के हाथों में लर्जन सी उठ गयी. इतने जोर से चूचियां दबाई के दिया उफ्फ़ कर उठी. बोली- कोई आ जाएगा. मैंने कहा- ठीक है, लेकिन बाद में प्रोग्राम बनाना पड़ेगा. वो मेरे बैठे लौड़े को सहलाते हुए बोली, ठीक है, लेकिन मैं अकेली नहीं चलने वाली. कहके उसने अखिला की और देखा. मैंने कहा, “हाँ हाँ, तीनों चलेंगे”. जैसे मैं एहसान कर रहा हूँ. मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे, लेकिन लौड़े में अभी भी सख्ती नहीं आयी थी. वो थोड़ी देर उपर से सहलाती रही, फिर उसने लंड को थोडा टटोला. मैंने पीछे से उसकी जींस में हाथ दे दिया. उसने अन्दर बहुत ही टाईट पेंटी पहन रखी थी. उसने अपनी गांड ऊपर को उठायी पर मेरा हाथ ज्यादा अन्दर न जा पाया. दिया ने लंड टटोल के पकड़ा तो लंड में थोडा जोश सा आया. मैंने घूम के अखिला के मम्मे पे ऊपर ऊपर से अपने होंठों से हलके से चुस्की ली. लौड़े में ऐसी झनझनाहट सी उठी के दिया ने भी महसूस किया. उसने हलके से मेरे लंड को दबाया फिर उसने हलके हलके से अपने हाथ से लंड दबा के अपना हाथ ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया. लौड़े में सख्ती धीरे धीरे बढ़ती गयी. एक मुठ लगाने के बाद दूसरी मुट्ठ में और भी ज्यादा आता है, इससे तो आप सहमत ही होंगे. तो ऐसी ही कुछ अपनी हालत थी. हर हलके हलके झटके से लौड़ा और उठा जा रहा था और मेरे शरीर की सारी गर्मी जैसे लौड़े में समा रही थी. मैंने अपना हाथ दिया की जींस में से निकल कर उसकी गांड के नीचे दे दिया और उसके कूल्हों को हौले हौले दबाने लगा. वो बहुत हलके हलके से सिस्कारियां लेने लगी. पीछे से अखिला मेरे कानों में हौले हौले से बोलने लगी – “बॉस, मजा आ रहा है ना”. मैं हकलाते हकलाते कुछ तो बोला हूँगा. मैंने दिया की गांड थोड़े जोर से दबानी शुरू कर दी, उसने भी मेरे लौड़े पे दबाव थोड़ा बढ़ा दिया. फिर वो मेरे कान में हलके हलके सिस्कारियां लेते हुए बोली- “बॉस, थोड़ा और जोर से, हाँ, मजा आ रहा है, वैसे ही करो जैसे अखिला के साथ किया था” मैंने हाँफते हाँफते कहा- “ज़रूर, आज रात एकदम”. कह के मैंने अपना मुंह ज़रा घुमाया और अखिला के मम्मों पे रगड़ने लगा, वो भी हल्की हल्की सिस्कारियां लेते हुए बोली- “बॉस, हम लोग कब से सोच रहे थे के तुम कोई शुरुआत करो, लेकिन तुम तो एकदम शर्मीले निकले, हमें ही करना पड़ा”. मैंने मन ही मन सोचा- “ठीक है, ऐसा सोचती है तो बढ़िया है, लेकिन मेरे से जो पूरी रात गांड मरवाई, वो मेरी शर्म का सबूत तो नहीं है”. खैर, दिया के हाथों में तेजी आती रही और मेरे लंड ने उठान मारनी शुरू कर दी. मैं ज़ोरों से दिया की गांड दबाता रहा. जींस के बाहर से भी उसकी टाईट पेंटी का साफ़ पता चल रहा था और उसकी गांड बड़ी सख्त महसूस हो रही थी. फिर दिया अपना हाथ मेरे लौड़े के एकदम निचले सिरे पे ले आयी और मैं एकदम मस्त हो गया. उसने जोर से अपने हाथों को मेरे लौड़े के निचले हिस्से पे कसा और दबाव और बढ़ा दिया, जैसे के निचोड़ रही हो. मैंने सिसकी सी लेते हुए कहा- “पूरा निचोड़ डालोगी, जानेमन”. दिया हंसी और बोली -“बॉस, जो काम आपने पकडाया है, पूरा करके ही रुकुंगी”. अखिला हंस पडी. मुझे थोड़ी करतूत सूझी. मैंने अखिला से कहा – “ज़रा दरवाजे पे खड़ी हो जाओ और नज़र रखो”. अखिला को मेरी खुराफात समझ में तो नहीं आयी लेकिन वो दरवाजे के पास खड़ी होके एक फाइल पढने की एक्टिंग करने लगी. मैंने अपनी पेंट की चैन खोली, चड्ढी नीचे सरकाई और अपने खड़े लंड को बाहर निकाला, फिर दिया का हाथ लेके अपना लंड उस में थाम दिया. फिर मैंने दिया से पूछा- “कुल्फी चलेगी?” दिया ने मेरी तरफ प्रशन्वाचक अंदाज़ से देखा, मैंने कुल्फी चूसने का मुंह बनाया और उसकी समझ में आ गया. बोली -“यहाँ?”. मैंने कहा -“हाँ मेरी जान, चिन्ता मत करो, दिया दरवाजे पे खड़ी है”. दिया नीचे फर्श पे घुटने लगा के बैठ गयी, फिर उसने मेरी टांगों को थोड़ा खोला और ठीक टांगों के बीच में बैठ गयी. जहां मैं बैठा था, वहाँ से मेरे और दिया के चेहरे के बीच में मेरा खडा लंड नज़र आ रहा था. उसने अपने हाथ से मेरे लंड को थोडा सा अपनी और खींचा और छोड़ दिया जैसे के गिटार की तार से छेड़ की हो. मेरा लौड़ा थोड़ी देर आगे पीछे होता रहा. एक सिरहन सी मेरे पेट से ले के लौड़े के सिरे तक दौड़ गयी. फिर दिया ने अपना हाथ ले के मेरे लौड़े की त्वचा को थोडा नीचे सरकाया और मेरा लाल सुपाड़ा एकदम बाहर निकल आया. फिर दिया ने हलके से मेरे सुपाडे पे पप्पी जड़ दी. आनंद से मेरी आँखें बंद हो उठी. मैंने अपना हाथ दिया के सर पे फिराया. मैंने आँखें खोली. उसके सुन्दर मासूम चेहरे पे शरारत लिखी हुई थी. हमारी आँखें एक दुसरे से मिली, मैं मुस्कुराया और मैंने अपने हाथ से उसके मुंह को अपने तने हुए लौड़े की ओर खींचा.

उसने हलके से ट्टटों के बीच में किस्स किया, फिर हलके हलके ऊपर आते आते मेरे तने हुए लंड के नीचे किस्स करते करते ऊपर सुपाडे की और आना ज़ारी रखा. उसके हर चुम्बन के साथ मेरे लौड़े को जैसे बिजली का झटका सा लगता था. उसके चुम्बन भी ऐसे, होंठ हलके हलके खुले हुए, एकदम नर्म नर्म गद्देदार और हलके से गीले गीले. ऐसे चुम्बन ले रही थी जैसे थोडा सा भी लंड पे दबाव डाला तो लंड टूट जाए. उसके गर्म गर्म सांस मेरे लंड से टकरा रहे थे. जैसे जैसे वो मेरे लौड़े के सुपाडे के नजदीक आती रही, मेरे लौड़े की छलांगें बढ़ती गयी. फिर उसने मेरे सुपाडे के ठीक नीचे पप्पी ली और रुक कर मेरी तरफ देखने लगी. मेरा लौड़ा सांस के साथ ऊपर को उठा, और सांस के साथ नीचे आ के उसके होठों से टकराया, उसके होंठ थोड़े खुले थे, वो मुस्कुराई. फिर उसने अपनी जीभ बाहर निकाली और मेरी गेंदों से ले के सुपाडे तक चाटती हुई आयी. फिर उसने मेरे सुपाडे के इर्द गिर्द अपनी जीभ घुमाई. मेरी आह सी निकली. मैं बोला- “वो, तुम तो एकदम एक्सपर्ट निकली”. उसने जवाब देने के लिए अपना सर पीछे हटाने की कोशिश की लेकिन मेरे हाथ ने उसे मेरे लौड़े से जुदा न होने दिया. मैंने कहा- “काम जारी रखो, डार्लिंग”. अब उसने अपनी जीभ मेरे सुपाडे के इर्द गिर्द घुमा के मेरे लंड के छेड़ पे लगा दी. फिर जीभ उठाने गिराने लगी और मेरे लंड से और सहा नहीं जा रहा था. मेरे लंड से हल्की सी चिकनाहट निकली और उसकी जीभ से लगी. उसने चाटना जारी रखा. फिर उसने अपना मुंह खोला और मेरे लंड को अपने नर्म नर्म होंठों के आगोश में दबोच लिया. इतना जोर से लंड चूसा के मेरी जोर से आह निकल उठी. दरवाजे पे खादी अखिला ने भी आवाज सुन के पलट के देखा, लेकिन इस हालत में अब मेरा खुद पे काबू नहीं था.

वो लौड़े को चूसने लगी और मुंह के अन्दर ही अन्दर से अपनी जीभ मेरे पंड पे घुमाने लगी. मैंने झुक के उसकी कमीज़ में हाथ डाल दिया, लेकिन उसकी ब्रा में हाथ डालना थोडा मुश्किल प्रतीत हुआ. मैंने उसका एंगेल थोडा अडजस्ट किया. अब मेरा हाथ उसकी ब्रा के अन्दर जा पा रहा था. मेरा हाथ उसके नर्म नर्म मम्मों पे फिसलता हुआ उसके चूश्कों तक पहुँच गया. अखिला के निप्पल भरे भरे और एकदम नर्म थे लेकिन दिया के निप्पल एकदम सख्त थे. मैंने उसके निप्पलों के चारों और अपनी उंगलियाँ फिराई और निप्पलों को अपने अंगूठे और तर्जनी उंगली के बीच में पकड़ लिया. हल्की सी सिस्कारे के साथ दिया ने लौड़े को थोडा और अपने मुंह में घुसेड़ा और बचे हुए लंड को हाथ में पकड़ के हलके हलकेसे मुठीयाने लगी. मैंने उसके हाथ हटा दिए और बोला- “जानेमन, मुंह से करो खाली. हाथ तो मैं भी हिला लेता हूँ.” सुन कर दिया ने लौड़े को और मुंह में घुसेड़ा और थोडा और ज़ोरों से चूसना शुरू कर दिया. फिर उसने अपना सर आगे पीछे करना शुरू किया. उसके मुंह की गर्माइश में लौड़ा एकदम सातवें आसमान पे जा पहुंचा था. बीच में दिया एक बार रुकी, लंड को हाथों में पकड़ा और चारों और से चूमा, चाटा और फिर मुंह में ले लिया. फिर वो ज़ोरों से अपने मुंह में मेरे लंड को अन्दर बाहर करने लगी. मैं इधर उसके मम्मों से खेले जा रहा था. बीच बीच में हलके से उसके निप्पलों पे च्यूंटी मार देता. मेरा लौड़ा अब किसी भी सेकंड सामान विसर्जन करने वाला था. मैंने दिया के सर पे हाथ रखा, मुंह आसमान की और किया और उसके हलक में अपना गरम गरम माल उतार दिया. दिया ने चूसना बंद किया और अपना सर पीछे करना चाहा लेकिन मैं आँखें बंद करके उसके सर को पकडे कोई दो मिनट तक बैठा रहा. जब मेरा सामान सब निकल चुका था, दिया ने हलके हलके से लंड को फिर चूसना शुरू किया. मेरे मुंह से लगातार एक लम्बी आह निकलती रही.

थोड़ी देर बाद दिया ने अपने मुंह से मेरा लंड बाहर निकाला. उसने मेरा लंड इतने ढंग से साफ़ किया था के एकदम सूखा सूखा सा लग रहा था. लंड के सिरे पे एक और बूँद सी निकल आयी. मैंने उसके होठों पे थोड़ी देर लंड रगडा. इतनी मस्त फीलिंग थी के बयान नहीं कर सकता. फिर मैंने थोड़ी देर उसके गाल पे लंड रखा. जी कर रहा था के पूरी उम्र उसके मुंह पे लंड रगड़ता रहूँ लेकिन अखिला खांस उठी. मैंने तुरंत अपनी पेंट की चैन बंद की, दिया जो एक नेपकिन ढून्ढ रही थी मेरे वीर्य को अपने मुंह से उगलने के लिए, होंठ भींच के बैठ गयी. बेचारी पे थोडा तरस आया, क्यूंकि मेरे ओफ्फिस में आने वाला प्राणी कोई १० मिनट तक मुझसे बात करता रहा और बीच में दिया को जवाब देना पड़ा. उस दिन दिया को मेरे वीर्य का घूँट पीना पड़ा, वो भी ओफ्फिस के दुसरे बन्दे के सामने.
आज सिर्फ इतनी कहानी दोस्तों. मेरा लंड फिर खड़ा हो गया है और चुदाई या मुठ का माहौल है, सो अब विदा. अगले अंक में, आप समझ ही गए होंगे, के दिया अच्छे से चुदने वाली है.

(being updated)

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